इस्तीफा नहीं, सिर्फ इन शर्तों पर टूटेगा अनशन’: सोनम वांगचुक ने खोल दिए सरकार के सामने रखे गए सारे पत्ते

लद्दाख के पर्यावरण और अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आंदोलन एक बार फिर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। उनके अनशन और विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच, सोनम वांगचुक ने खुद सामने आकर उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि उनका यह आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। वांगचुक ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के इस्तीफे के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के भविष्य और वहां की संवैधानिक सुरक्षा से जुड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने उन स्पष्ट शर्तों का भी खुलासा किया है जिनके पूरा होने पर ही वे अपना यह लंबा अनशन समाप्त करेंगे।

क्या सचमुच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं सोनम वांगचुक?

हाल ही में सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर कई तरह की बातें फैलाई गईं। लोगों का मानना था कि शायद यह प्रदर्शन केंद्र सरकार के किसी खास मंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत आक्रोश का परिणाम है। लेकिन इन तमाम चर्चाओं को खारिज करते हुए सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या किसी अन्य व्यक्ति के इस्तीफे की मांग से बिल्कुल जुड़ा हुआ नहीं है। उनका यह आंदोलन लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संविधान की छठी अनुसूची के तहत मिलने वाले विशेष दर्जे की बहाली के लिए है, जो इस क्षेत्र की मूल पहचान से जुड़ा हुआ है।

किन शर्तों पर टूटेगा अनशन? सोनम वांगचुक ने रखी अपनी मुख्य मांगें

सरकार के सामने अपनी बात पूरी दृढ़ता से रखते हुए सोनम वांगचुक ने उन मुख्य शर्तों का जिक्र किया है जिनके माने बिना उनका अनशन खत्म नहीं होगा। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule): लद्दाख के आदिवासी बहुल इलाके को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना, ताकि वहां की जमीन, संस्कृति और संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।

  • पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को एक अलग और पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए ताकि स्थानीय लोगों की अपनी लोकतांत्रिक चुनी हुई सरकार हो।

  • लोकतांत्रिक अधिकार और रोजगार: युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और लद्दाख के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना।

सरकार और लद्दाख के बीच आगे क्या होगा रुख?

सोनम वांगचुक के इस कड़े रुख और स्पष्टीकरण के बाद अब केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यावरणविदों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों का समर्थन लगातार वांगचुक को मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत का दौर शुरू नहीं करती है, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार सोनम वांगचुक की इन जायज शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और कब तक कोई ठोस समाधान निकलता है।