
देश में नकली नोटों (Fake Currency) के कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बेहद कड़ा और सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक की हालिया आंतरिक समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि कुछ बैंकों की तरफ से जाली नोटों (FICN) की पहचान और उनकी रोकथाम के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए आरबीआई ने देश के सभी बैंकों को नए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (International Borders) से लगे जिलों की सभी बैंक शाखाओं में नोटों की प्रामाणिकता जांचने और उन्हें छांटने वाली मशीनें अनिवार्य रूप से लगाई जाएंगी।
बॉर्डर वाले जिलों की बैंकों के लिए कड़े निर्देश
आरबीआई की तरफ से यह बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि बैंकों में आने वाले हर एक नोट की जांच आधुनिक मशीनों के जरिए होना अब जरूरी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि देश की आर्थिक सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। यदि बैंक में कैश जमा करते समय जांच के दौरान कोई जाली नोट पकड़ा जाता है, तो बैंक उसे तुरंत जब्त कर लेगा। सबसे खास बात यह है कि किसी भी परिस्थिति में नकली नोट जमा करने वाले ग्राहक को वह नोट वापस नहीं लौटाया जाएगा और न ही बैंक स्तर पर उसे नष्ट किया जाएगा। इसके अलावा, पकड़े गए सभी फर्जी नोटों की पूरी रिपोर्ट तय दिशा-निर्देशों के तहत समय पर आरबीआई को भेजना अनिवार्य होगा।
31 अक्टूबर 2026 तक कैश स्टाफ के लिए स्पेशल ट्रेनिंग
बैंकों के अंदर कैश संभालने वाले कर्मचारियों को असली और नकली नोटों की पहचान में पूरी तरह पारंगत बनाने के लिए आरबीआई ने एक निश्चित समय-सीमा तय की है। केंद्रीय बैंक के आदेश के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2026 तक सभी कैश हैंडलिंग स्टाफ को असली नोटों के सुरक्षा फीचर्स (Safety Features) की विशेष ट्रेनिंग हर हाल में पूरी करनी होगी। इसके साथ ही, देश की सभी बैंक शाखाओं को अपने यहां अल्ट्रा-वायलेट लैंप (UV Lamp) और नोट सॉर्टिंग मशीनें दोबारा और सुचारू रूप से चालू हालत में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
‘फोर्ज्ड नोट विजिलेंस’ सेल और हॉटस्पॉट की पहचान
नकली नोटों के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आरबीआई ने बैंकों के ‘फोर्ज्ड नोट विजिलेंस’ (FNV) सेल को और अधिक सक्रिय और जिम्मेदार बनाने को कहा है।
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यह विजिलेंस सेल अब बैंकों में मिलने वाले जाली नोटों के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण (Analysis) करेगी।
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इस डेटा एनालिसिस से उन खास इलाकों या ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान करने में मदद मिलेगी जहां नकली नोटों का चलन सबसे ज्यादा है।
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इस महत्वपूर्ण जानकारी के आधार पर बैंक अपनी निगरानी को और ज्यादा मजबूत करेंगे तथा अपने कर्मचारियों की क्षमताओं को सही दिशा में फोकस करेंगे, जिससे फर्जीवाड़े के इस सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
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