आरएसएस को खुली छूट’, राहुल गांधी का तीखा हमला

भारतीय राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे तीर और राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और कानून व्यवस्था पर सीधा और आक्रामक प्रहार किया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ सनसनीखेज वीडियो शेयर करते हुए गंभीर दावा किया है कि देश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को पूरी तरह से ‘खुली छूट’ दे दी गई है और पुलिस प्रशासन को युवाओं व विरोध प्रदर्शन करने वाले नागरिकों पर लाठियां बरसाने तथा उनकी बेरहमी से पिटाई करने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। कांग्रेस नेता के इन बयानों और वीडियो के सामने आने के बाद देश भर की राजनीतिक फिजा गर्म हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच एक बार फिर जुबानी जंग छिड़ गई है।

राहुल गांधी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पुलिसर्किमयों द्वारा कुछ युवाओं और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित रूप से की जा रही सख्ती और मारपीट के दृश्यों को दिखाया गया है। इन वीडियो को साझा करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश के युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है। उनका कहना है कि जब युवा अपने भविष्य, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन्हें सुनने के बजाय प्रशासन उनकी आवाज को डंडों और बल के प्रयोग से दबाने की कोशिश करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वैचारिक रूप से प्रेरित होकर राज्य मशीनरी का इस्तेमाल नागरिकों के दमन के लिए किया जा रहा है, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है। कांग्रेस पार्टी का यह भी तर्क है कि देश के भीतर असहमति की हर आवाज को आपराधिक करार देने की खतरनाक प्रवृत्ति बढ़ रही है।

राहुल गांधी के इस हमले के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में भारी भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों ने राहुल गांधी के इन बयानों को पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और देश की छवि को धूमिल करने की सुनियोजित साजिश करार दिया है। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी हर बार देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, पुलिस बलों और न्यायपालिका का मनोबल गिराने का काम करते हैं। भाजपा प्रवक्ताओं का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों और पुलिस प्रशासन का कर्तव्य है, और जब कुछ लोग कानून हाथ में लेते हैं या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं, तो पुलिस को अपनी ड्यूटी निभानी ही पड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख इस तरह के सनसनीखेज आरोप लगाकर समाज में भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने देश भर में एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पुलिस सुधारों और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकारों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। नागरिक समाज के कई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि पुलिस बल और जनता के बीच का यह बढ़ता टकराव देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए शुभ संकेत नहीं है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और व्यवस्था के प्रति असंतोष के बीच इस तरह के टकराव आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। बहरहाल, राहुल गांधी के इस ताजा दावे ने चुनावी और राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है, और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है।