आईफोन 18 के आने से पहले स्मार्टफोन बाजार में लगी आग; चिप्स 400% महंगी होने से सैमसंग, शाओमी, वीवो के दाम भी आसमान पर

अगर आप इस साल नया स्मार्टफोन या आईफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। नई आईफोन 18 सीरीज (iPhone 18 Series) के आधिकारिक लॉन्च से पहले ही यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि नए आईफोन को खरीदना अब बेहद महंगा सौदा होने वाला है। एपल के सीईओ टिम कुक ने हाल ही में संकेत दिया है कि मेमोरी चिप्स की आसमान छूती कीमतों के बीच पुराने दामों पर नए डिवाइस बेचना अब कंपनी के लिए मुमकिन नहीं रह गया है। हालांकि एपल ने अभी तक आधिकारिक तौर पर आईफोन की एमआरपी (MRP) में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाली विशेष छूट, बैंक ऑफर्स और कैशबैक सपोर्ट में अंदरखाने कटौती शुरू कर दी है। इसका सीधा असर बाजार में दिखने लगा है, जहां आईफोन 15 और आईफोन 16 सीरीज पर मिलने वाला पुराना भारी-भरकम डिस्काउंट अब गायब हो चुका है।

लेकिन यह कहानी सिर्फ एपल तक ही सीमित नहीं है। पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री इस समय पुर्जों की बढ़ती लागत, महंगी मेमोरी चिप्स, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये और ग्लोबल सप्लाई चेन की गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। काउंटरपॉइंट रिसर्च, IDC और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि कई बड़ी टेक कंपनियां पहले ही अपने स्मार्टफोन के दाम चुपके से बढ़ा चुकी हैं। सैमसंग, शाओमी, रियलमी, वनप्लस और वीवो जैसे बड़े ब्रांड्स ने अपने फोन महंगे कर दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में भारतीय ग्राहकों पर इसका कितना बड़ा असर होने वाला है?

पुर्जों की लागत में तेज उछाल, पुराने दामों पर फोन बेचना नामुमकिन

काउंटरपॉइंट रिसर्च और आईडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले मुख्य पुर्जों— जैसे मेमोरी चिप्स, प्रोसेसर, एडवांस कैमरा सेंसर और बैटरी की लागत में जबरदस्त उछाल आया है। डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने विदेशों से कलपुर्जे मंगाना और ज्यादा खर्चीला बना दिया है। फोन बनाने की कुल इनपुट कॉस्ट (उत्पादन लागत) बढ़ने के कारण ब्रांड्स के लिए पुरानी एमआरपी पर टिके रहना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यही वजह है कि कंपनियां धीरे-धीरे लेकिन लगातार अपने हैंडसेट्स की कीमतें बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा बोझ घूम-फिरकर आम भारतीय ग्राहकों की जेब पर ही आ रहा है।

बाजार की मौजूदा स्थिति पर एक नजर:

  • स्मार्टफोन में लगने वाली मेमोरी चिप्स की कीमतें पिछली तीन तिमाहियों में 400% तक बढ़ चुकी हैं।

  • वीवो, ओप्पो, रियलमी और शाओमी ने अपने कई लोकप्रिय मॉडल्स के दाम चुपके से बढ़ा दिए हैं।

  • भारतीय बाजार से 10,000 रुपये से कम कीमत वाले बेहतरीन 5G स्मार्टफोन अब तेजी से गायब हो रहे हैं।

  • बढ़ती महंगाई के चलते वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में 3% की गिरावट दर्ज हुई है।

AI बूम बना विलेन: डेटा सेंटर्स ने सोख ली दुनिया की मेमोरी चिप्स

स्मार्टफोन के अचानक इतने महंगे होने की सबसे बड़ी और मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत और उनकी बढ़ती कीमतें हैं। दरअसल, इस समय पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जबरदस्त बूम चल रहा है। एनवीडिया, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर नए एआई डेटा सेंटर्स का निर्माण कर रही हैं। इन विशाल डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए बहुत भारी मात्रा में हाई-स्पीड DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी चिप्स की जरूरत पड़ रही है।

चिप बनाने वाली सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी बड़ी कंपनियां अब स्मार्टफोन ब्रांड्स को छोड़कर एआई सेक्टर को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि वहां उन्हें कई गुना ज्यादा मुनाफा मिल रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, इसी खींचतान की वजह से पिछले नौ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतें करीब 400 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। जो मेमोरी चिप पहले स्मार्टफोन कंपनियों को महज 20 डॉलर में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 75 डॉलर के पार पहुंच गई है।

रैम और स्टोरेज का खर्च हुआ दोगुना, प्रीमियम फीचर्स देना हुआ मुश्किल

इंडस्ट्री की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले किसी भी स्मार्टफोन को बनाने की कुल लागत (Bill of Materials) में रैम और इंटरनल स्टोरेज का हिस्सा मात्र 10 से 15 प्रतिशत हुआ करता था। लेकिन चिप्स की महंगाई के कारण अब यह हिस्सा बढ़कर सीधे 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा, आजकल के फोन्स में मिलने वाले हैवी एआई फीचर्स को सपोर्ट करने के लिए महंगे प्रोसेसर, बड़े कैमरा सेंसर और ज्यादा क्षमता वाली बैटरियों ने भी उत्पादन खर्च को बढ़ा दिया है। अब कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कम कीमत वाले बजट फोन्स में प्रीमियम फीचर्स कैसे दें। यही कारण है कि नए स्मार्टफोन अपने पुराने वेरिएंट्स की तुलना में काफी महंगी कीमत पर लॉन्च किए जा रहे हैं।

बजट से लेकर फ्लैगशिप तक; जानिए किस कंपनी ने कितने बढ़ाए दाम

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के आंकड़ों के मुताबिक, कीमतों में आई यह तेजी किसी एक ब्रांड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरी इंडस्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया है:

  • वीवो और ओप्पो: वीवो ने अपने मिड-रेंज और बजट सेगमेंट के कई मॉडल्स की कीमतों में 18 से 40 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी की है। वहीं, ओप्पो के कुछ चुनिंदा मॉडल्स भी 9 से 41 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं।

  • शाओमी और रियलमी: चीनी स्मार्टफोन दिग्गज शाओमी ने अपने फोन के दाम 3 से 32 प्रतिशत तक बढ़ाए हैं। सबसे ज्यादा झटका रियलमी के ग्राहकों को लगा है, जिसने कीमतों में 6 से 53 प्रतिशत तक का उछाल किया है। कई मामलों में रियलमी के नए सक्सेसर मॉडल पुराने वेरिएंट्स की तुलना में सीधे 5,000 से 15,000 रुपये तक महंगे लॉन्च हुए हैं।

  • मोटोरोला: मोटोरोला के जो बेहतरीन बजट 5G फोन पहले भारतीय बाजार में 9,999 रुपये की आक्रामक कीमत पर मिल जाते थे, उनकी शुरुआती कीमत अब बढ़कर 11,999 रुपये या उससे ऊपर पहुंच चुकी है।

प्रीमियम और फ्लैगशिप सेगमेंट भी महंगाई से अछूता नहीं

अगर आपको लगता है कि यह महंगाई सिर्फ बजट फोन्स तक सीमित है, तो आप गलत हैं। सैमसंग, वनप्लस और आईक्यू (iQOO) जैसे प्रीमियम ब्रांड्स भी लागत के इस भारी दबाव से पूरी तरह टूट चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग का सबसे महंगा फ्लैगशिप फोन ‘गैलेक्सी S26 अल्ट्रा’ अपने पिछले मॉडल की तुलना में करीब 10,000 रुपये ज्यादा महंगी कीमत पर बाजार में उतारा गया है।

वनप्लस और आईक्यू ने भी अपने नए प्रीमियम स्मार्टफोन मॉडल्स की लॉन्चिंग प्राइस में 5,000 से 12,000 रुपये तक की बड़ी वृद्धि की है। वहीं, नथिंग (Nothing) के चर्चित सीईओ कार्ल पेई ने भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि पुर्जों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लागत के कारण 30,000 रुपये से ऊपर वाले प्रीमियम फोन्स की कीमतों में औसतन 7,000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ग्राहकों पर क्या हो रहा है असर; रिफर्बिश्ड मार्केट की तरफ बढ़ा झुकाव

स्मार्टफोन की इन बढ़ती कीमतों का बेहद नकारात्मक असर अब भारतीय रिटेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। काउंटरपॉइंट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत के भीतर स्मार्टफोन की कुल शिपमेंट में 3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसे पिछले छह वर्षों का सबसे कमजोर और निराशाजनक प्रदर्शन माना जा रहा है। पूरे साल के लिए इस बाजार में 10 प्रतिशत तक की बड़ी मंदी का अनुमान लगाया गया है।

सबसे बुरा असर देश के उस मध्यमवर्गीय बजट सेगमेंट पर पड़ा है जो 10 से 15 हजार रुपये के दायरे में फोन खरीदता था। अब 10,000 रुपये से कम में एक अच्छा 5G फोन ढूंढना लगभग नामुमकिन हो गया है। जो फोन पहले आसानी से 15,000 रुपये में मिल जाते थे, उनके जैसे फीचर्स के लिए अब भारतीय ग्राहकों को 20,000 से 25,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसी वजह से देश में पुराने और रिफर्बिश्ड (Refurbished) स्मार्टफोन का बाजार बहुत तेजी से पैर पसार रहा है।

क्या भविष्य में कम होंगे दाम? जानिए एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन की कीमतों में आई यह भारी बढ़ोतरी कोई अस्थाई या कुछ दिनों का बदलाव नहीं है। मेमोरी चिप्स की यह वैश्विक कमी और कंपोनेंट्स की बढ़ी हुई लागत का यह तगड़ा दबाव साल 2027 के अंत तक लगातार बना रह सकता है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस साल दिवाली और त्योहारों के सीजन के दौरान मिलने वाले बड़े डिस्काउंट और ऑफर्स भी पहले जैसे आकर्षक नहीं रहेंगे। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले महीनों में न सिर्फ एपल, बल्कि सैमसंग, शाओमी, वनप्लस जैसी सभी कंपनियों के स्मार्टफोन और ज्यादा महंगे हो सकते हैं।

स्मार्टफोन की इस महंगाई से बचने के लिए यूजर्स के पास क्या हैं रास्ते?

इस भारी मंदी और महंगाई के बीच भारतीय ग्राहकों के पास अपने बजट को बचाने के लिए कुछ बेहद व्यावहारिक विकल्प अभी भी मौजूद हैं:

  • फोन को लंबे समय तक चलाना: सबसे पहला और समझदारी भरा रास्ता यह है कि अपने मौजूदा स्मार्टफोन को ही कुछ समय और ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। यही वजह है कि हाल के महीनों में भारतीय उपभोक्ता हर साल फोन अपग्रेड करने के बजाय अपने पुराने डिवाइस को ही दो से तीन साल तक खींच रहे हैं।

  • रिफर्बिश्ड बाजार का रुख करना: नए फोन महंगे होने के कारण सर्टिफाइड पुराने या रिफर्बिश्ड फोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल देश में रिफर्बिश्ड फोन्स की बिक्री 2.5 करोड़ यूनिट से उछलकर सीधे 3.2 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है।

  • मिड-रेंज सेगमेंट को चुनना: कई स्मार्ट ग्राहक अब सीधे 70-80 हजार रुपये के फ्लैगशिप मॉडल पर पैसा लगाने की जगह 25 से 30 हजार रुपये वाले वैल्यू-फॉर-मनी मिड-रेंज स्मार्टफोन चुन रहे हैं, ताकि उन्हें लेटेस्ट फीचर्स भी मिल जाएं और उनका घरेलू बजट भी न बिगड़े।