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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी बड़ी सफाई, ट्रेड डील पर आया बड़ा अपडेट

हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लागू की गई सख्त टैरिफ नीतियों और वर्क वीजा (H-1B और ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग) के नियमों में किए गए बदलावों के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया व व्यापारिक गलियारों में यह सवाल जोर-शोर से उठ रहा था कि क्या अमेरिका जानबूझकर भारत को निशाना बना रहा है। इस गरमाए माहौल के बीच भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने मुंबई में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण बैठक के दौरान इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन की व्यापार और वीजा नीतियां किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक संतुलन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात और उस पर अमेरिकी प्रतिक्रिया के सवाल का जवाब देते हुए मार्को रुबियो ने एक बेहद व्यावहारिक और कूटनीतिक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि “भूगोल एक वास्तविकता है” (Geography is real) और प्रत्येक देश के पास ऊर्जा सुरक्षा व आपूर्ति को लेकर अपनी परिस्थितियां और भौगोलिक चुनौतियां होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जब राष्ट्रीय सुरक्षा छूट (National Security Waivers) या टैरिफ से जुड़े कड़े नीतिगत फैसले लेते हैं, तो वे भारत के साथ रणनीतिक संबंधों की गहराई को ध्यान में रखते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत जैसे बड़े देश के लिए ऊर्जा स्रोतों में अचानक बदलाव करना आसान नहीं है, और अमेरिका रणनीतिक साझेदारों पर अपनी नीतियों के प्रभावों का संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

व्यापार सौदे (Bilateral Trade Agreement) पर सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित अपडेट देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के “बेहद करीब” पहुंच चुके हैं। रुबियो के अनुसार, यह समझौता केवल महीनों की बात नहीं है, बल्कि अब “महीनों में नहीं, कुछ ही हफ्तों” में पूरा होने की उम्मीद है। वार्ता अब अंतिम तकनीकी विवरणों और विधिक भाषा (Legal Text) को अंतिम रूप देने के चरण में है। इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी से बढ़ोतरी होगी और भारतीय विनिर्माताओं (Manufacturers) को अमेरिकी बाजार में वियतनाम और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के समान प्रतिस्पर्धी टैरिफ दरें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

ग्रीन कार्ड और आईटी पेशेवरों के लिए वीजा नियमों में की गई सख्ती पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिया है कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य वीजा प्रणाली में हो रहे दुरुपयोग को रोकना और निष्पक्षता लाना है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच तकनीक, एआई (AI) और उच्च कुशल मानव संसाधनों का आदान-प्रदान दोनों देशों के आर्थिक भविष्य की धुरी है। इसलिए कानूनी और कुशल श्रम गतिशीलता (Skilled Labour Mobility) को बाधित किए बिना दोनों देश एक सुगम और पारदर्शी ढांचा तैयार करने पर सहमति बना रहे हैं।

मार्को रुबियो की मुंबई और गुजरात (जामनगर) यात्रा मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत को अपनी उन्नत ऊर्जा तकनीकों, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और रक्षा प्रणालियों के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में देख रहा है। 21वीं सदी के लिए “भारत-अमेरिका कंपैक्ट” (COMPACT for the 21st Century) के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने पर सहमत हुए हैं। रुबियो ने जोर देकर कहा कि भले ही दो संप्रभु राष्ट्रों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब राष्ट्रीय हितों के मूल मुद्दों की बात आती है, तो भारत और अमेरिका का तालमेल अभूतपूर्व है।