Prabhat Vaibhav, Digital Desk :‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। देहरादून से मसूरी के बीच लगने वाले घंटों के जाम और बाटलनेक की समस्या अब इतिहास बनने वाली है। केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के विजन के अनुरूप, एनएचएआइ (NHAI) ने झाझरा-मसूरी टू-लेन हाईवे पर काम तेज कर दिया है। इस नए मार्ग के बनने के बाद देहरादून से मसूरी का सफर महज 30 मिनट का रह जाएगा।
तीन अलग रास्तों से बंटेगा मसूरी का ट्रैफिक
अभी तक मसूरी जाने के लिए मुख्य रूप से एक ही मार्ग पर निर्भरता थी, लेकिन भविष्य में यात्रियों के पास तीन विकल्प होंगे:
राजपुर रोड (पारंपरिक मार्ग): यह सबसे पुराना रूट है (राजपुर रोड-कुठालगेट-मसूरी), जिस पर फिलहाल सबसे ज्यादा दबाव रहता है।
किमाड़ी मार्ग (वैकल्पिक): यह शांत रास्ता है लेकिन बारिश के दिनों में अक्सर भूस्खलन के कारण बंद हो जाता है।
झाझरा-मसूरी हाईवे (नया कॉरिडोर): यह 42 किमी लंबा हाईवे भविष्य का मुख्य कॉरिडोर होगा, जो देहरादून शहर के बाहर से ही ट्रैफिक को सीधे मसूरी पहुंचा देगा।
झाझरा-मसूरी टू-लेन हाईवे: प्रोजेक्ट की खास बातें
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल लंबाई | 42 किमी |
| अनुमानित लागत | ₹3500 करोड़ |
| रूट | झाझरा – चासकोट – खनिज नगर – लाइब्रेरी चौक |
| प्रमुख सुरंगें | जॉर्ज एवरेस्ट के नीचे (2.9 किमी) और हिल सेक्शन में (2 किमी) |
दो सुरंगें बदलेंगी सफर का अंदाज
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें प्रस्तावित दो सुरंगें हैं। जॉर्ज एवरेस्ट के नीचे बनने वाली 2.9 किमी लंबी सुरंग और मसूरी हिल सेक्शन में 2 किमी की सुरंग न केवल दूरी कम करेगी, बल्कि संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में सफर को सुरक्षित और सुगम बनाएगी। वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान वर्तमान में मिट्टी और चट्टानों का सर्वे कर रहा है ताकि निर्माण के दौरान भूस्खलन जैसी चुनौतियों को न्यूनतम किया जा सके।
देहरादून को मिलेगी ‘दमघोंटू’ जाम से राहत
इस नए मार्ग के बनने से देहरादून शहर के भीतर का ट्रैफिक लोड पूरी तरह बदल जाएगा:
बाहरी ट्रैफिक डायवर्जन: दिल्ली या अन्य राज्यों से आने वाला ट्रैफिक शहर में घुसे बिना सीधे बाईपास के जरिए मसूरी निकल जाएगा।
राजपुर रोड पर राहत: शहर की मुख्य सड़कों पर लगने वाला जाम खत्म होगा।
गंगोत्री रूट से जुड़ाव: यह हाईवे आगे उत्तरकाशी और गंगोत्री मार्ग से जुड़ेगा, जिससे चारधाम यात्रियों को भी सुविधा होगी।
क्यों पड़ी नए मार्ग की जरूरत?
मसूरी में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। साल 2000 में जहां 8.5 लाख पर्यटक आए थे, वहीं 2019 में यह आंकड़ा 30 लाख पार कर गया था। मौजूदा मसूरी मार्ग पर गलोगी क्षेत्र जैसे बाटलनेक और भारी भीड़ के कारण 30 किमी का सफर तय करने में घंटों लग जाते हैं, जिसे यह नया हाईवे मात्र आधे घंटे में समेट देगा
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