‘अब तक नहीं हुआ सत्रावसान, क्या गृह मंत्री परिसीमन बिल के लिए दो-तिहाई बहुमत तलाश रहे’, कांग्रेस ने उठाए सवाल

संसद के सत्र की समाप्ति और उसके आधिकारिक सत्रावसान (Prorogation) को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और विशेष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सत्र समाप्त होने के बाद भी अब तक सत्रावसान न होना किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के तीखे सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और उसके औपचारिक सत्रावसान के बीच आमतौर पर कुछ दिनों का अंतर होता है, लेकिन इस बार की देरी काफी असामान्य है।

जयराम रमेश ने एम. एन. कौल और एस. एल. शकधर की प्रसिद्ध पुस्तक ‘प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर ऑफ पार्लियामेंट’ के नियमों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अभी भी संसद के किसी विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए ‘दागदार’ दो-तिहाई बहुमत की तलाश कर रहे हैं?

क्या है पूरा राजनीतिक घटनाक्रम और नियम?

संसदीय नियमों के अनुसार, अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर सदन के सत्रावसान का आदेश देते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पूर्व में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को लेकर पर्याप्त संख्या बल जुटाने में असहज रही है। विपक्षी दलों का दावा है कि उनकी रणनीतिक आपत्तियों के चलते सरकार को वांछित दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है।