
पंजाब का उच्च शिक्षण माहौल पिछले कुछ दिनों से अप्रत्याशित तनाव, छात्र आक्रोश और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के गंभीर संकट से जूझ रहा है। राज्य के दो सबसे बड़े और प्रतिष्ठित निजी उच्च शिक्षण संस्थानों—पटियाला के निकट स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी (Chitkara University) और फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU)—में बड़े पैमाने पर छात्रों का आंदोलन अचानक उग्र हो उठा। यद्यपि पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन की भारी मुस्तैदी के बाद अब दोनों परिसरों में स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है, लेकिन दोनों ही जगहों पर हुई बड़े पैमाने की तोड़फोड़, आगजनी और हिंसक झड़पों ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस महानिदेशक (DGP) से लेकर स्थानीय खुफिया एजेंसियां अब इस संवेदनशील कोण से जांच कर रही हैं कि क्या हजारों छात्रों का यह आक्रोश महज सोशल मीडिया की निराधार अफवाहों का परिणाम था, या फिर राज्य में शांति व्यवस्था को अस्थिर करने के लिए किसी सुनियोजित साजिश के तहत असामाजिक तत्वों (Anti-Social Elements) ने इस आग को हवा दी थी। कैंपस में मची भारी तबाही और राष्ट्रीय राजमार्ग पर मचे हंगामे के बाद दोनों संस्थानों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और जांच एजेंसियों ने उपद्रवियों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी है।
इस समूचे घटनाक्रम की चिंगारी सबसे पहले चितकारा यूनिवर्सिटी कैंपस में सुलगनी शुरू हुई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और छात्रों के अनौपचारिक वॉट्सऐप ग्रुप्स पर अचानक यह सनसनीखेज सूचना प्रसारित की जाने लगी कि हॉस्टल से दो छात्राएं पिछले दो दिनों से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हैं। इस अपुष्ट खबर के तेजी से फैलते ही हॉस्टल और कैंपस के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर इकट्ठा होने लगे। देखते ही देखते शांतिपूर्ण धरना हिंसक प्रदर्शन में तब्दील हो गया। आक्रोशित छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर मामले को दबाने और छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की और कैंपस की संपत्तियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
हालात की नजाकत को भांपते हुए बनूर के डीएसपी सुखदेव सिंह और स्थानीय थाना प्रभारी गुरसेवक सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में छात्रों के प्रतिनिधिमंडलों से आमने-सामने बातचीत की और मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक छानबीन में यह बात सामने आई कि गायब होने का दावा करने वाले छात्रों में से कोई भी उन कथित लापता लड़कियों के नाम, पहचान, रोल नंबर या उनके विभाग की जानकारी नहीं दे सका। स्थानीय पुलिस और विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि किसी भी अभिभावक की ओर से कोई गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है और प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला दुर्भावनापूर्ण अफवाह साबित हुआ है। पुलिस ने छात्रों को सख्त भरोसा दिलाया कि परिसर पूरी तरह सुरक्षित है और यदि कोई भी वास्तविक शिकायत आती है तो त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चितकारा यूनिवर्सिटी की घटना अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) का विशालकाय कैंपस भी इसी तरह के भयावह आरोपों की चपेट में आ गया। सोशल मीडिया पर एक बाहरी व्यक्ति द्वारा कैंपस के भीतर एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म किए जाने की अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई। इस संवेदनशील सूचना के सामने आते ही शनिवार देर शाम हजारों की तादाद में छात्र हॉस्टलों से बाहर निकल आए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह आक्रोश कैंपस की दीवारों को लांघकर बाहर आ गया और छात्रों ने दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को पूरी तरह जाम कर दिया।
यह चक्का जाम लगातार 15 घंटे से अधिक समय तक खिंच गया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबा भीषण ट्रैफिक जाम लग गया और हजारों आम मुसाफिर बेबस फंसे रहे। रविवार की देर रात प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखा टकराव हुआ। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने कई सरकारी व निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिनमें पुलिस की गश्ती गाड़ियां भी शामिल थीं। पथराव और आगजनी में कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, एलपीयू के डीन सौरव लखनपाल ने आधिकारिक बयान जारी कर दुष्कर्म के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। डीन लखनपाल ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय ने आंतरिक सुरक्षा और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मामले की गहन पड़ताल की है, जिसमें किसी भी ऐसी घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक मनगढ़ंत अफवाह थी जिसे जानबूझकर उकसाने के लिए फैलाया गया था। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर प्रशासन ने अगले 10 दिनों के लिए विश्वविद्यालय की सभी नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं।
घटना की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय व गैर-राज्यीय छात्रों की भारी संख्या को देखते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव स्वयं फगवाड़ा पहुंचे और एलपीयू कैंपस का विस्तृत मुआयना किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डीआईजी जालंधर रेंज नवीन सिंगला, एसएसपी कपूरथला गौरव तूरा, एसएसपी होशियारपुर और एसएसपी जालंधर रूरल आधी रात को ही भारी पुलिस बल के साथ मोर्चे पर डटे रहे। पुलिस ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए उग्र छात्रों और प्रबंधन के बीच संवाद स्थापित कराया, जिसके बाद राजमार्ग से जाम हटाया जा सका।
डीजीपी गौरव यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई कर शांति भंग करने की कोशिश की और पुलिस वाहनों पर जानलेवा पथराव किया। उन्होंने ऐलान किया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहराई से पड़ताल के लिए एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया है। डीजीपी ने कहा कि कैंपस और नेशनल हाईवे पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का साइंटिफिक और टेक्निकल एनालिसिस किया जा रहा है। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि जो कोई भी छात्र या बाहरी उपद्रवी कानून को अपने हाथ में लेता हुआ पाया जाएगा, उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कैंपस की इस अशांति ने राज्य के सियासी पारे को भी पूरी तरह गर्मा दिया है। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी की सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घेरना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पंजाब सरकार राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हो चुकी है। बादल ने कहा कि अगर खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन समय रहते हरकत में आता, तो राष्ट्रीय राजमार्ग पर घंटों तक चलने वाली अराजकता को टाला जा सकता था। उन्होंने छात्रों पर की गई कथित पुलिसिया सख्ती की भी कड़ी निंदा की।
वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने इस अशांति को एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया। बिट्टू ने आरोप लगाया कि वर्तमान में भाजपा के ‘ड्रग-फ्री पंजाब’ अभियान को प्रदेश के युवाओं और आम जनता से जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है, और जनता का ध्यान इस अभियान तथा सरकार की प्रशासनिक विफलताओं से भटकाने के लिए ही सुनियोजित तरीके से विश्वविद्यालयों में ऐसी भड़काऊ अफवाहें फैलाई गईं। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दोनों परिसरों में शांति बनी हुई है, लेकिन अफवाहों की संवेदनशीलता और सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।
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