
भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ हमारे किसान भाई हैं। खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितता, खाद-बीज की बढ़ती कीमतें, डीजल-सिंचाई के खर्च और बाजार में फसलों के सही दाम न मिलने से अक्सर किसानों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो जाती है। इसी जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत और अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं का एक त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र (Three-Tier Safety Net) तैयार किया है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, सीतापुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज और बुंदेलखंड के बीहड़ों से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब तक के करोड़ों किसान इन योजनाओं से अपनी जिंदगी संवार रहे हैं। हालांकि, आज भी सही जानकारी और प्रक्रिया की समझ न होने के कारण बहुत से छोटे और सीमांत किसान इन योजनाओं के पूर्ण लाभ से वंचित रह जाते हैं। यदि आप भी खेती करते हैं, तो सरकार की तीन प्रमुख योजनाएं—प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) और संशोधित किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)—आपकी जेब, आपकी खेती और आपके बुढ़ापे को पूरी तरह सुरक्षित कर सकती हैं।
किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (PM-KISAN) देश की सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को खेती की बुवाई के समय बीज, खाद और कीटनाशक खरीदने के लिए समय पर नकदी सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि साल में तीन बराबर किस्तों (हर चार महीने में ₹2,000-₹2,000) में सीधे किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। पहली किस्त अप्रैल-जुलाई, दूसरी किस्त अगस्त-नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर-मार्च के बीच जारी की जाती है।
इस योजना का लाभ पाने के लिए सरकार ने तीन बुनियादी औपचारिकताएं अनिवार्य कर रखी हैं:
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किसान के बैंक खाते का आधार कार्ड और एनपीसीआई (NPCI) मैपर से सक्रिय रूप से लिंक होना।
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पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर या नजदीकी जनसेवा केंद्र (CSC) से चेहरे (Face Authentication) या बायोमेट्रिक से ‘e-KYC’ पूरा करना।
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राज्य सरकार के राजस्व रिकॉर्ड में किसान की भूमि का भौतिक और डिजिटल सत्यापन यानी ‘लैंड सीडिंग’ (Land Seeding) होना।
यदि किसी किसान के दस्तावेज पूरे हैं, तो बिना किसी बिचौलिए या कमीशन के हर साल यह ₹6,000 सीधे उसके खाते में पहुंचते हैं, जिससे साहूकारों से छोटे खर्चों के लिए कर्ज लेने की मजबूरी खत्म हो जाती है।
खेती-किसानी में लगे असंगठित क्षेत्र के बुजुर्ग किसानों के पास रिटायरमेंट के बाद कोई सामाजिक सुरक्षा या मासिक आय का साधन नहीं होता। इसी दर्द को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना’ (PM-KMY) शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक और अंशदायी (Contributory) पेंशन योजना है, जो 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद किसान को जीवन भर 3,000 रुपये प्रति माह (सालाना 36,000 रुपये) की सुनिश्चित पेंशन की कानूनी गारंटी देती है। इस योजना में 18 से 40 वर्ष की आयु के वे सभी छोटे और सीमांत किसान शामिल हो सकते हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर (लगभग 5 एकड़) तक की कृषि योग्य भूमि है।
योजना का गणित बेहद सरल और व्यावहारिक है:
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आवेदक किसान की प्रवेश आयु के आधार पर उसे हर महीने 55 रुपये से लेकर अधिकतम 200 रुपये तक का मामूली प्रीमियम जमा करना होता है (18 वर्ष की आयु पर मात्र ₹55 प्रति माह और 40 वर्ष की आयु पर ₹200 प्रति माह)।
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जितनी राशि किसान अपनी जेब से जमा करता है, ठीक उतनी ही 50% मैचिंग राशि केंद्र सरकार अपनी तरफ से किसान के पेंशन खाते में जमा करती है।
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सबसे शानदार और सहूलियत भरा नियम यह है कि यदि आप पहले से पीएम-किसान के लाभार्थी हैं, तो आपको अपनी जेब से कोई प्रीमियम भरने की जरूरत नहीं है। आप सीधे एक सहमति पत्र (Consent Form) देकर अपने पीएम-किसान के ₹2,000 में से ही इस मासिक प्रीमियम को ऑटो-डेबिट करवा सकते हैं।
60 वर्ष की उम्र के बाद यदि पेंशनभोगी किसान की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पत्नी या पति को पारिवारिक पेंशन के रूप में 50 प्रतिशत यानी 1,500 रुपये प्रति माह की पेंशन आजीवन मिलती रहती है।
खेती की लागत को पूरा करने और किसानों को गांव के सूदखोरों और साहूकारों के 24% से 36% वाले जानलेवा ब्याज चक्रव्यूह से बचाने के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) योजना सबसे बड़ा वित्तीय वरदान है। केंद्र सरकार ने संशोधित ब्याज छूट योजना (MISS) के तहत केसीसी के नियमों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए रियायती कृषि ऋण की सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख तक कर दिया है।
केसीसी के तहत ब्याज और सब्सिडी का पूरा गणित इस प्रकार काम करता है:
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बैंकों द्वारा कृषि ऋण पर सामान्यतः 9% की बेस दर तय होती है, लेकिन केंद्र सरकार इस पर 2% से 3% की ब्याज छूट (Interest Subvention) देती है, जिससे शुरुआती दर घटकर 7% रह जाती है।
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इसके अलावा, यदि कोई किसान अपने लोन की मूल रकम और ब्याज को तय समयसीमा (Due Date) के भीतर ईमानदारी से चुका देता है, तो सरकार उसे 3% का अतिरिक्त ‘प्रॉम्प्ट रीपेमेंट इंसेंटिव’ (PRI) प्रदान करती है।
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इस 3% अतिरिक्त छूट के बाद किसान के लिए प्रभावी ब्याज दर (Effective Interest Rate) गिरकर मात्र 4 प्रतिशत प्रति वर्ष रह जाती है।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने बिना किसी जमीन को गिरवी रखे (Collateral-Free Loan) मिलने वाले कर्ज की सीमा को भी 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दिया है। अब केसीसी का दायरा केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डेयरी फार्मिंग, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और कृषि उपकरणों के रखरखाव के लिए भी किसान रियायती दरों पर वर्किंग कैपिटल लोन ले सकते हैं। यह कार्ड 5 वर्षों के लिए वैध होता है और हर साल खेती की लागत के अनुसार इसकी क्रेडिट लिमिट में 10% की स्वचालित बढ़ोतरी का भी प्रावधान है।
किसानों की सुविधा के लिए इन तीनों प्रमुख योजनाओं के मुख्य मापदंडों, आर्थिक लाभों और शर्तों की तुलना नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझी जा सकती है:
| योजना का नाम | मुख्य लाभ (आर्थिक सहायता) | पात्रता (उम्र एवं भूमि सीमा) | प्रीमियम / लागत | प्रमुख सरकारी शर्त |
| PM-KISAN सम्मान निधि | ₹6,000 सालाना (₹2,000 की 3 किस्तें) | सभी भूमिधारक किसान (संवैधानिक पद/आयकरदाता बाहर) | 100% निशुल्क (सरकारी सहायता) | आधार सीडेड बैंक खाता, लैंड सीडिंग और e-KYC अनिवार्य |
| PM-KMY किसान मानधन | ₹3,000 प्रति माह पेंशन (60 की उम्र के बाद) | 18 से 40 वर्ष की आयु, 2 हेक्टेयर (5 एकड़) तक जमीन | ₹55 से ₹200 प्रति माह (सरकार देती है 50% बराबर अंशदान) | 60 वर्ष तक अंशदान, पीएम किसान से ऑटो-डेबिट की सुविधा |
| Kisan Credit Card (KCC) | ₹5 लाख तक का रियायती लोन | 18 से 75 वर्ष (मालिक, बटाईदार व पशुपालक शामिल) | समय पर चुकाने पर मात्र 4% प्रभावी वार्षिक ब्याज | ₹2 लाख तक बिना गारंटी लोन, 5 साल की कार्ड वैधता |
इन तीनों योजनाओं का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। किसान अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन पोर्टल से या अपने गांव के नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), सहज जनसेवा केंद्र या बैंक शाखा में जाकर आवेदन कर सकते हैं:
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पीएम किसान सम्मान निधि के लिए: आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाएं, ‘Farmers Corner’ में जाकर ‘New Farmer Registration’ पर क्लिक करें। अपना आधार नंबर, राज्य, जिला और मोबाइल नंबर दर्ज करें। अपनी खतौनी/जमीन के दस्तावेज (खसरा-खतौनी नकल) अपलोड करें।
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पीएम किसान मानधन योजना के लिए: मानधन पोर्टल maandhan.in पर जाएं या नजदीकी सीएससी सेंटर पर जाएं। अपना आधार कार्ड, बचत बैंक खाते का विवरण (पासबुक/कैंसिल्ड चेक) और पीएम किसान पंजीकरण संख्या लेकर जाएं। सीएससी वीएलई (VLE) आपका रजिस्ट्रेशन कर देगा और हाथों-हाथ ‘किसान पेंशन कार्ड’ जारी हो जाएगा।
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किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने के लिए: यदि आप पहले से पीएम-किसान के लाभार्थी हैं, तो पीएम-किसान पोर्टल से एक पेज का सरल केसीसी फॉर्म डाउनलोड करें। इस फॉर्म के साथ अपनी जमीन के राजस्व दस्तावेज (खसरा-खतौनी), आधार कार्ड, पैन कार्ड, दो पासपोर्ट फोटो और अपनी बोई जाने वाली फसलों का विवरण लेकर उस बैंक शाखा में जमा करें जहां आपका पीएम-किसान का खाता है। आरबीआई के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर बैंक को 14 कार्यदिवसों के भीतर किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत करना अनिवार्य है।
तीनों योजनाओं का संयुक्त लाभ उठाकर एक किसान न केवल वर्तमान में खेती की लागत के बोझ से मुक्त हो सकता है, बल्कि 4% के सस्ते कर्ज से आधुनिक कृषि यंत्र व उन्नत बीज अपनाकर अपनी पैदावार बढ़ा सकता है और 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹3,000 की पेंशन के साथ अपना बुढ़ापा पूरी तरह आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बना सकता है।
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