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अनुपम खेर ने उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को क्यों घेरा

बॉलीवुड के दिग्गज और बेबाक अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) इन दिनों एक अनूठे विवाद के चलते सुर्खियों में छाए हुए हैं, जिसने उत्तराखंड के राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। मामला देहरादून में आयोजित एक बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है, जहां मंच पर जो कुछ भी घटा, उसने देश भर के कलाकारों और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस पूरे प्रकरण के केंद्र में मशहूर पंजाबी गायक और पाॅप स्टार दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) हैं, जिन्हें लेकर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने मंच से कुछ ऐसी टिप्पणियां कर दी थीं, जिससे न सिर्फ वहां मौजूद लोग हैरान रह गए बल्कि अब दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर खुलकर दलेर मेहंदी के समर्थन में उतर आए हैं। अनुपम खेर ने सोशल मीडिया और मीडिया के मंचों से सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री के इस बर्ताव को अनुचित और निंदनीय करार देते हुए तीखा हमला बोला है।

यह पूरा विवाद देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ, जहां देश के कई जाने-माने कलाकार और राजनेता अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान जब लोकप्रिय गायक दलेर मेहंदी अपनी परफॉर्मेंस और कला से दर्शकों का दिल जीत रहे थे, उसी दौरान उत्तराखंड के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने मंच से कुछ ऐसे इशारे और बयान दे दिए, जिन्हें दलेर मेहंदी और उनके प्रशंसकों ने सीधे तौर पर अपमानजनक माना। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री द्वारा गायक के खान-पान या निजी जीवन को लेकर कुछ ऐसी बातें सार्वजनिक मंच से कह दी गईं जो एक प्रतिष्ठित कलाकार की गरिमा के खिलाफ थीं। हालांकि यह बात सभी जानते हैं कि दलेर मेहंदी अपनी ऊर्जावान गायकी के साथ-साथ अपने धार्मिक और सादगी भरे जीवन के लिए भी जाने जाते हैं, लेकिन एक सरकारी मंत्री द्वारा इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी ने कलाकारों के आत्मसम्मान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

जब यह विवाद तेजी से सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने लगा, तब बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार अनुपम खेर ने आगे आकर इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी और सुबोध उनियाल को आड़े हाथों लिया। अनुपम खेर ने मीडिया से बातचीत और अपने बयानों में दो टूक शब्दों में कहा कि एक सार्वजनिक पद पर बैठे हुए जिम्मेदार राजनेता को मंच की गरिमा और वहां मौजूद मेहमानों के मान-सम्मान का पूरा ख्याल रखना चाहिए। अनुपम खेर ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह दलेर मेहंदी को व्यक्तिगत रूप से बहुत अच्छी तरह जानते हैं और इस बात की पूरी गारंटी लेते हैं कि दलेर मेहंदी अपने जीवन में कभी भी शराब या किसी भी तरह के नशे को हाथ तक नहीं लगाते हैं। अनुपम खेर ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि कैसे कुछ लोग बिना किसी पुख्ता जानकारी के केवल सुर्खियों में आने के लिए या हल्की बयानबाजी के चक्कर में देश के नामी कलाकारों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा देते हैं।

अनुपम खेर के इस बयान के सामने आने के बाद उत्तराखंड की स्थानीय राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है और विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता भी कैबिनेट मंत्री के इस रवैये की कड़ी आलोचना कर रही है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे देवभूमि राज्य में देश-विदेश से आने वाले कलाकारों, संतों और मेहमानों का स्वागत अतिथि देवो भवः की भावना से किया जाना चाहिए, न कि इस प्रकार की विवादपूर्ण और ओछी टिप्पणियां करके उनका अपमान करना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी फैंस लगातार दलेर मेहंदी के समर्थन में उतर आए हैं और उनका कहना है कि अपनी सुरीली आवाज से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले कलाकारों के साथ इस तरह का बर्ताव किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में जल्द ही कोई समझदारी भरा कदम नहीं उठाया गया, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस बात पर गंभीर बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय लोगों को अपनी वाणी पर कितना संयम रखना चाहिए। भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पूरी दुनिया में फैलाने वाले कलाकार अपनी कला के माध्यम से देश का मान बढ़ाते हैं और जब ऐसे लोगों को मंच पर ही इस तरह की असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है, तो यह पूरे कला जगत के लिए चिंता का विषय बन जाता है। दलेर मेहंदी ने अपनी जिंदगी में संगीत के जरिए हमेशा लोगों को जोड़ने और सकारात्मकता फैलाने का काम किया है, ऐसे में उनके खिलाफ की गई इस तरह की टिप्पणी निंदनीय ही कही जाएगी। अनुपम खेर का इस मुश्किल समय में एक दोस्त और सहकर्मी के रूप में खड़े होकर मोर्चा संभालना यह साबित करता है कि फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार संकट के समय में एक-दूसरे के साथ चट्टान की तरह खड़े रहते हैं। अब देखना यह होगा कि इस तीखी आलोचना और बढ़ते दबाव के बाद उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।