अटल जी की 8वीं पुण्यतिथि पर नमन: लखनऊ में सीएम योगी करेंगे भावभीनी पुष्पांजलि

भारतीय राजनीति के अजातशत्रु, प्रखर वक्ता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी और अटल जी की कर्मभूमि रहे लखनऊ में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी आज लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रमों में शिरकत कर पूर्व प्रधानमंत्री को नमन करेंगे।

सुबह से ही राजधानी लखनऊ के लोक भवन स्थित अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य कांस्य प्रतिमा पर गणमान्य नागरिकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने का सिलसिला जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल जी के सुशासन, राष्ट्र प्रथम की भावना और समावेशी विकास मॉडल को याद करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का ऐसा पथप्रदर्शक बताया, जिन्होंने भारतीय राजनीति को मूल्यों, सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की नई दिशा प्रदान की।

‘अटल स्मृति संध्या’: लखनऊ के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में गूंजेंगी कालजयी कविताएं

अटल जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आज शाम लखनऊ के चौक स्थित साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में भव्य ‘अटल स्मृति संध्या’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक और साहित्यिक संध्या पूरी तरह से अटल जी के कवि-हृदय और उनकी अमर रचनाओं को समर्पित होगी। कार्यक्रम में देश के ख्यातिप्राप्त कवि, साहित्यकार और संगीतकार हिस्सा लेंगे, जो अटल जी की प्रमुख कविताओं का पाठ और संगीतमय गायन प्रस्तुत करेंगे।

अटल स्मृति संध्या के मंच से ‘गीत नया गाता हूं’, ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा’, ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ और ‘मौत से ठन गई’ जैसी कालजयी रचनाओं की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस गरिमामयी समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में अटल जी के साथ लंबे समय तक कार्य कर चुके पुराने सहयोगियों और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। स्मृति संध्या के माध्यम से नई पीढ़ी को अटल जी के राष्ट्रवादी विचारों, उनकी साहित्यिक संवेदनशीलता और राजनीतिक शुचिता से परिचित कराने का विशेष प्रयास किया गया है।

लखनऊ और अटल जी का अटूट प्रेम: लगातार 5 बार सांसद बनने का ऐतिहासिक सफर

अटल बिहारी वाजपेयी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच का संबंध केवल एक सांसद और संसदीय क्षेत्र का नहीं था, बल्कि यह आत्मीयता, सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव का रिश्ता था। लखनऊ ने अटल जी को लगातार पांच बार (1991, 1996, 1998, 1999 और 2004) लोकसभा में चुनकर भेजा और इसी शहर के प्रतिनिधित्व के दौरान उन्होंने तीन बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

अटल जी लखनऊ की तहजीब, खान-पान और यहां के लोगों से बेपनाह मोहब्बत करते थे। पुराने लखनऊ की गलियों से लेकर हजरतगंज की बैठकों तक, अटल जी का हर किसी से सीधा संवाद रहता था। लखनऊ के विकास के लिए उन्होंने जो विजन तैयार किया था, उसी की बदौलत आज राजधानी में शहीद पथ, अंतरराष्ट्रीय स्तर का रिंग रोड नेटवर्क, रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण, और वैज्ञानिक शोध संस्थानों का विस्तार देखने को मिलता है। लखनऊ के लोग आज भी गर्व से कहते हैं कि अटल जी उनके दिल में बसते हैं और शहर का कोना-कोना उनके विकास कार्यों की गवाही देता है।

पोखरण-2 से स्वर्णिम चतुर्भुज तक: राष्ट्र निर्माण में अटल जी के ऐतिहासिक फैसले

प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने विपरीत वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच देश को परमाणु महाशक्ति बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया:

  • पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998): अमेरिका समेत दुनिया की महाशक्तियों की खुफिया एजेंसियों को चकमा देते हुए 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण कर भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया।

  • कारगिल विजय और दृढ़ कूटनीति (1999): पाकिस्तान द्वारा धोखे से कब्जा की गई भारतीय चौकियों को ‘ऑपरेशन विजय’ के जरिए छुड़ाकर भारतीय सेना के शौर्य को दुनिया में साबित किया और वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग किया।

  • स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): देश के चारों महानगरों को जोड़ने वाले विशाल हाईवे नेटवर्क और भारत के दूरदराज के गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने वाली पीएमजीएसवाई की नींव रखकर देश के बुनियादी ढांचे में क्रांति ला दी।

  • सर्व शिक्षा अभियान: ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ के नारे के साथ देश के हर बच्चे को प्राथमिक शिक्षा का मौलिक अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया।

  • दूरसंचार क्रांति (Telecom Revolution): भारत में मोबाइल और इंटरनेट क्रांति की नींव रखने का श्रेय अटल सरकार की नीतियों को जाता है, जिसने आम नागरिक तक कनेक्टिविटी पहुंचाई।

कवि-हृदय राजनेता: जब संसद में विरोधियों ने भी माना उनकी वाणी का लोहा

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में से थे, जिनका सम्मान सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी दल के नेता भी दिल से करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और बाद के तमाम विपक्षी नेताओं ने संसद में अटल जी के भाषणों की हमेशा मुक्तकंठ से प्रशंसा की। संसद में जब अटल जी बोलना शुरू करते थे, तो पूरा सदन पिन-ड्रॉप साइलेंस के साथ उनके एक-एक शब्द को सुनता था।

वे राजनीति में कटुता के घोर विरोधी थे। जब 1996 में उनकी सरकार केवल 13 दिनों में एक वोट से गिर गई थी, तब संसद के पटल पर दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण—”सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए”—आज भी भारतीय लोकतंत्र की सबसे प्रेरणादायी धरोहर माना जाता है। उन्होंने गठबंधन की राजनीति को सफलतापूर्वक चलाकर यह साबित किया कि विभिन्न विचारधाराओं के दलों को एक साथ लेकर राष्ट्रीय हित में कैसे काम किया जाता है।

सुशासन और समावेशी भारत का संकल्प: आज भी प्रासंगिक हैं अटल जी के विचार

अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन (25 दिसंबर) को पूरे देश में ‘सुशासन दिवस’ (Good Governance Day) के रूप में मनाया जाता है। उनका स्पष्ट मानना था कि लोकतंत्र की सफलता अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने में निहित है।

आज जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है, तब अटल जी द्वारा बोए गए आर्थिक सुधारों, स्वदेशी तकनीक, आत्मनिर्भरता और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बीज वटवृक्ष बन चुके हैं। लखनऊ में आयोजित हो रही पुण्यतिथि के ये कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि भर नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उस संकल्प को दोहराने का माध्यम हैं, जिसे अटल जी ने अपने पूरे जीवन में जिया और देश को समर्पित किया।