नई दिल्ली। सनातन धर्म में ‘अक्षय तृतीया’ को अबूझ मुहूर्त और अनंत पुण्य फल देने वाला दिन माना जाता है। साल 2026 में अक्षय तृतीया का पर्व एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। इस बार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर ‘अक्षय योग’ का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस विशिष्ट दिन पर सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी-अपनी उच्च राशि में विराजमान रहेंगे, जो एक अत्यंत शक्तिशाली स्थिति है।
ऐसी दिव्य ग्रह स्थिति के कारण कुछ विशेष राशियों के जीवन में धन, सुख-समृद्धि और सफलता के द्वार खुलने जा रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है इस दिन का महत्व और किन राशियों की खुलने वाली है लॉटरी।
क्यों दुर्लभ है साल 2026 की अक्षय तृतीया?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 2026 में अक्षय तृतीया इसलिए खास है क्योंकि इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे। सूर्य और चंद्रमा का एक साथ उच्च राशि में होना ‘अक्षय योग’ का निर्माण करता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसीलिए इसे ‘अक्षय’ कहा जाता है।
इन 3 राशियों पर बरसेगी विशेष कृपा
1. मेष राशि (Aries): करियर में तरक्की के योग
मेष राशि के जातकों के लिए यह अक्षय योग मान-सम्मान में वृद्धि लेकर आएगा।
कार्यक्षेत्र: ऑफिस में आपके काम को नई पहचान मिलेगी और उच्चाधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा।
सावधानी: आर्थिक रूप से कुछ छोटी चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन जीवनसाथी के सहयोग से आप उन्हें पार कर लेंगे। अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें।
2. तुला राशि (Libra): संकटों से मिलेगी मुक्ति
तुला राशि वालों के लिए अक्षय तृतीया का दिन राहत भरा साबित होगा।
सफलता: लंबे समय से अटके हुए कार्य अचानक गति पकड़ेंगे। मानसिक तनाव कम होगा और मन प्रसन्न रहेगा।
पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी मांगलिक कार्य की रूपरेखा बन सकती है। अपनों के साथ यात्रा या पर्यटन के योग भी बन रहे हैं।
3. धनु राशि (Sagittarius): भाग्य का मिलेगा भरपूर साथ
धनु राशि के जातकों के लिए यह समय ‘गोल्डन पीरियड’ जैसा हो सकता है।
धन लाभ: आर्थिक मोर्चे पर प्रगति होगी और निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
शिक्षा: छात्रों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिल सकती है। जीवनसाथी का समर्थन आपके आत्मविश्वास को दोगुना कर देगा।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार:
इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था।
भगवान परशुराम का अवतार भी इसी तिथि को हुआ था।
इस दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे संस्कार किए जा सकते हैं।
इस दिन क्या करें और क्या खरीदें?
अक्षय तृतीया पर दान और खरीदारी का विशेष महत्व है। यदि आप भारी निवेश नहीं कर सकते, तो कुछ छोटी चीजें भी शुभ फल दे सकती हैं:
दान: शीतल जल, सत्तू, पंखा, और अनाज का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।
खरीदारी: सोना या चांदी खरीदना समृद्धि का प्रतीक है। यदि संभव न हो तो जौ या पीली कौड़ी भी खरीदी जा सकती है।
पूजा: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का एक साथ अभिषेक करने से घर में कभी दरिद्रता नहीं आती।
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