Sunday , January 18 2026

EPFO Pension : क्या प्राइवेट कर्मचारियों को मिलेंगे 7,500 रुपये? सरकार ने संसद में खोल दिए सारे पत्ते

News India Live, Digital Desk: अगर आप या आपके घर के बड़े-बुजुर्ग प्राइवेट नौकरी (Private Job) से रिटायर हुए हैं, तो एक दर्द आप अच्छे से समझते होंगे। वो दर्द हैEPS-95 (Employees’ Pension Scheme) के तहत मिलने वाली नामात्र पेंशन का।सोचिए, जिंदगी के 30-35 साल खपाने के बाद अगर बुढ़ापे में सहारे के नाम पर सिर्फ़ 1000 या 1200 रुपये मिलें, तो उस इंसान पर क्या बीतती होगी? आजकल इतने रुपये में तो एक वक़्त की सब्जी-भाजी भी ठीक से नहीं आती, दवाई का खर्चा तो भूल ही जाइये।इसी को लेकर लम्बे समय से मांग चल रही है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर₹7,500 + DA (महंगाई भत्ता) किया जाए। हाल ही में इस मुद्दे पर सरकार ने संसद में अपनी स्थिति साफ़ की है। आइए, आसान भाषा में जानते हैं कि क्या वाकई पेंशन बढ़ने वाली है या ये इंतज़ार अभी और लम्बा चलेगा।क्या मांग रहे हैं पेंशनर्स?कहानी बहुत सीधी है।नेशनल एजीटेशन कमेटी (NAC) और लाखों पेंशनभोगी चाहते हैं कि:न्यूनतम मासिक पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 की जाए।इसके साथ महंगाई भत्ता (DA) भी जोड़ा जाए।रिटायर लोगों को और उनकी पत्नियों को मुफ्त मेडिकल सुविधा मिले।यह मांग एकदम जायज भी लगती है क्योंकि मौजूदा महंगाई में 1000 रुपये “ऊंट के मुंह में जीरे” के बराबर है।सरकार ने क्या जवाब दिया? (Reality Check)हम सब उम्मीद कर रहे थे कि शायद इस बार सरकार कोई ‘बंपर’ खुशखबरी सुना दे। लेकिन लेबर मिनिस्ट्री (श्रम मंत्रालय) और वित्त मंत्रालय का रुख थोड़ा सख्त नजर आ रहा है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी (1000 से सीधा 7500) तुरंत लागू करना मुश्किल है। इसके पीछे सरकार ने दो-तीन तर्क दिए हैं:फंड की कमी: सरकार का कहना है कि पेंशन फंड में जो योगदान (Contribution) आता है, वो इतना नहीं है कि सबको ₹7,500 दिया जा सके।गणित का पेंच: ईपीएफओ (EPFO) एक बीमा आधारित योजना है। आप जितना जमा करेंगे, उसी हिसाब से रिटर्न मिलेगा। बिना अतिरिक्त बजटीय समर्थन के यह संभव नहीं है।आसान शब्दों में कहें तो सरकार ने गोल-मोल जवाब देते हुए गेंद फिर से”विचार-विमर्श” के पाले में डाल दी है। उन्होंने प्रस्ताव को पूरी तरह ख़ारिज नहीं किया है, लेकिन कोई तारीख भी नहीं बताई है कि पैसा कब बढ़ेगा।समिति की रिपोर्ट का क्या हुआ?खबरों के मुताबिक़, सरकार ने दो कमेटियों की सिफारिशों का हवाला दिया है। सिफारिशें कहती हैं कि पेंशन बढ़नी चाहिए, लेकिन यह बढ़ोतरी सरकार के खज़ाने पर भारी बोझ डालेगी। इसलिए वित्त मंत्रालय इस पर अभी “हां” भरने के मूड में नहीं दिख रहा है।पेंशनर्स का दर्द: “आश्वासन से पेट नहीं भरता साहब!”बुजुर्गों में इस जवाब से काफी निराशा है। उनका कहना है,”हम कब तक कमेटियों की रिपोर्ट का इंतज़ार करें? उम्र बीत रही है।” महाराष्ट्र और दिल्ली में इसको लेकर कई बार धरने भी दिए गए, लेकिन परिणाम वही ‘तारीख पे तारीख’।तो अब आगे क्या?फिलहाल की स्थिति यह है कि अगर आप प्राइवेट कर्मचारी हैं और EPS-95 के दायरे में आते हैं, तो अभी आपको पुरानी पेंशन राशि से ही काम चलाना पड़ सकता है।हाँ, एक उम्मीद की किरण’Higher Pension’ (उच्च पेंशन) के विकल्प में ज़रूर है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू किया गया है। लेकिन उसमें भी कागजी पेंच इतने हैं कि आम आदमी उलझ कर रह गया है।सरकार का स्टैंड अब क्लियर है वे रातों-रात पेंशन 7500 रुपये नहीं करने वाले। यह लड़ाई लंबी चलेगी। जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम आप तक जरूर पहुंचाएंगे।