राम कथा मंच से सीएम योगी का बड़ा संदेश: संस्कृति पर हमला करने वालों को नहीं मिलेगी जगह, बोले- भारत की पहचान सनातन मूल्यों से

लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय ‘श्री राम कथा महोत्सव’ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में पहुंचकर श्रद्धालुओं और संत समाज को संबोधित किया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज की पावन राम कथा के मंच से मुख्यमंत्री ने देश की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।

सांस्कृतिक सुरक्षा पर सीएम योगी का स्पष्ट संदेश

समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक सुरक्षा और सनातन मूल्यों की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। भारत की पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक विरासत से है, जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।

राम कथा से मिलता है राष्ट्र निर्माण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि आदर्श शासन, सामाजिक समरसता, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण का प्रेरक मार्ग भी है। राम कथा समाज को जोड़ने, नैतिक मूल्यों को मजबूत करने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का माध्यम बनती है।

उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं तथा लोगों को भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों से जोड़ते हैं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के योगदान की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज के आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य जी वर्षों से रामकथा, शिक्षा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु

श्री राम कथा महोत्सव के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्ति, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक चेतना का विशेष वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने राम कथा का रसपान कर धर्म, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संदेश को आत्मसात किया।कार्यक्रम का समापन धार्मिक अनुष्ठानों, संतों के आशीर्वचन और भारत की सांस्कृतिक एकता एवं अखंडता के संकल्प के साथ हुआ।