राज खोसला की फिल्म ‘वो कौन थी’ का गीत ‘लग जा गले’ और उसकी दिलचस्प कहानी

फिल्म ‘वो कौन थी’ का मशहूर गीत

मुंबई: ‘वो कौन थी’ फिल्म का ‘लग जा गले’ गीत हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अनमोल रत्न है, जिसका जादू आज भी बरकरार है। यह गीत भारतीय फिल्म संगीत के सबसे प्रिय गीतों में से एक माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब फिल्म के निर्माता राज खोसला को यह धुन पसंद नहीं आई थी।

राज खोसला ने संगीतकार मदन मोहन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। हालाँकि, अभिनेता मनोज कुमार की पहल ने स्थिति को बदल दिया और यह गीत फिल्म का हिस्सा बन सका।

9 जून को राज खोसला की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर हम उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से साझा कर रहे हैं। राज खोसला हिंदी सिनेमा के उन सफल निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने रहस्य, रोमांस और सस्पेंस से भरपूर कई यादगार फिल्में बनाई हैं। उनकी फिल्मों की विशेषता मजबूत कहानी और दर्शकों को अंत तक बांधे रखने वाली प्रस्तुति होती थी।

राज खोसला का जन्म 31 मई 1925 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपने करियर में कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया, जिसमें अभिनेत्री साधना के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से लोकप्रिय रही। ‘वो कौन थी’, ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसी फिल्में आज भी हिंदी सिनेमा की बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर मानी जाती हैं।

1964 में रिलीज हुई ‘वो कौन थी’ में साधना और मनोज कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार मदन मोहन ने तैयार किया था। इसी फिल्म में ‘लग जा गले’ गीत शामिल था, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी। इस गाने के पीछे एक मजेदार किस्सा है।

मदन मोहन के बेटे समीर कोहली ने एक इंटरव्यू में इस गीत से जुड़ी एक रोचक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि जब मदन मोहन ने पहली बार ‘लग जा गले’ की धुन राज खोसला को सुनाई, तो निर्देशक को यह पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के संगीत की उम्मीद नहीं थी। राज खोसला को लगा कि यह धुन फिल्म की जरूरत के अनुसार प्रभावशाली नहीं है।

हालांकि, मदन मोहन को अपनी रचना पर पूरा विश्वास था। उन्होंने एक बैठक आयोजित की, जिसमें फिल्म से जुड़े अन्य लोग भी शामिल थे। अभिनेता मनोज कुमार ने राज खोसला से अनुरोध किया कि वे इस धुन को एक बार फिर ध्यान से सुनें।

जब मदन मोहन ने दोबारा यह धुन गाकर सुनाई, तो माहौल पूरी तरह बदल गया। इस बार राज खोसला ने गीत की भावनात्मक गहराई और उसकी खूबसूरती को महसूस किया। धुन खत्म होते ही उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया पर अफसोस जताया। उन्होंने मजाक में कहा कि उन्हें अपना जूता उठाकर खुद को मारने का मन कर रहा है, क्योंकि उन्होंने इतनी शानदार धुन को खारिज कर दिया था।

बाद में मनोज कुमार गर्व से बताते थे कि इस गीत को फिल्म में बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। समय ने साबित कर दिया कि यह निर्णय कितना सही था। ‘लग जा गले’ आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद है और भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार गीतों में से एक है।