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‘हे आर्य पुत्रों, हे रामभक्तों तुम्हे अयोध्या बुला रही है’

अयोध्या, 24 दिसम्बर (हि.स.)। हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की, ये रामायण है पुण्य कथा श्रीराम की।। प्रभु श्रीराम का गुणगान करने के साथ सांस्कृतिक मंच पर लोक कलाकारों ने भजनों के जरिए जादुई आवाज से श्रीराम जन्मभूमि पर श्रीराम सत्संग भवन को भक्तिमय बना दिया। रूद्राक्षतम और शिव तांडव ने तांडव मचाया तो वहीं स्वर लहरियों की मधुरता ने लोगों को गुनगुनाने व झूमने पर मजबूर कर दिया। मौका था अयोध्या उत्सव का।

वाराणसी के सरोद वादक पं. विकास महाराज व उनके पुत्रों ने शास्त्रीय संगीत से समां बांधा। पं. विकास महाराज ने काशी विश्वनाथ बाबा की डमरू की धुन को तबले व सरोद के स्वर में उतारा, जिसकी धुन पर बाबा का शयन आरती होती है। इसके उपरांत लोक कलाकार धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने भजन के माध्यम से ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोता अपनी सुध-बुध खो बैठे। देर रात तक लोगों ने अयोध्या उत्सव में डुबकी लगाई। कार्यक्रम का समापन सुंदर कांड की चौपाई से हुआ। कार्यक्रम का संचालन हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के समाचार समन्वयक पदुम नारायण द्विवेदी ने किया। लोक कलाकारों को सम्मानित किया गया।

ये हैं भजन के बोल…

’मैं काशी हूं, मैं काशी हूं…’

’हजारों सालों की प्रतीक्षा

पांच सौ वर्षों की कठिन परीक्षा

सफल हुई भक्तों की तपस्या

अवध पूरी की धरा मगन हो

सरयू मइया की धारा मगन हो

जय श्रीराम गा रही है’

’दमक रहा है श्रीराम मंदिर,

चमक रहा है श्रीराम मंदिर

हे आर्य पुत्रों हे रामभक्तों

तुम्हे अयोध्या बुला रही है

दिवाली सी जगमगा रही है’

’जो कार सेवक है उनका वंदन

सभी के मस्तक पे आज चंदन

हनुमानगढ़ी और कनक भवन में

मइया लुभा रही है

हे सनातनी और हे रामभक्तों

तुम्हे अयोध्या बुला रही है’

’कण कण भी जहां का पारस है

उस जगह का नाम बनारस है

जयकारा लगे काशी नगरी

जय हो भोले शंकर गिरिराज लली

जय हो गंगा मइया जय काशी नगरी

ओम हर हर हर महादेव’

’ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

पूरा कैलाश पर्वत मगन हो गया

देवताओं का मन भी मचलने लगा

देवताओं का मन भी मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

पूरा कैलाश पर्वत मगन हो गया’