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श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह देख श्रद्धालु हुए निहाल

वाराणसी, 24 नवम्बर (हि.स.)। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में शुक्रवार शाम को श्री तुलसी- शालिग्राम भगवान का विवाह देख श्रद्धालु आह्लादित दिखे। मारूति नगर गंगा-तट लंका में आयोजित महायज्ञ स्थल पर जुटे श्रद्धालुओं ने तुलसी विवाह में आजीवन बाल ब्रह्मचारी संतों को घराती-बराती बनते देखा।

अद्भुत विवाह में पीठाधीश्वर संत घराती बन कन्यादान कर रहे थे,सखी बनकर वधू श्री तुलसी जी को हल्दी लगा रहे थे, विवाह गीत गा रहे थे, वर श्री शालिग्राम भगवान को परम्परागत गालियां सुना रहे थे। कोई वधू का भाई बनकर वधू की मां बने संत को ईमली घोंटा रहा था तो कोई पंडित बन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह के विभिन्न चरणों को संपन्न करा रहा था। यह दृष्य देख मंद-मंद मुस्कुरा रहे वीतरागी परिव्राजक संत श्रीलक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज संतों को उत्साहित करते रहे।

महायज्ञ में आए श्रद्धालु आनंद विभोर होकर संतों के साथ विवाह गीतों और गालियों में सहभागी बन रहे थे। वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्प वर्षा के बीच वर श्री शालिग्राम भगवान की डोली का स्वागत किया गया। संत जीयर स्वामी के नेतृत्व में जगद्गुरू शिवपूजन शास्त्री, अयोध्या नाथ स्वामी, बैकुण्ठनाथ स्वामी, मुक्तिनाथ स्वामी आदि संतों ने बरातियों का स्वागत किया। जगद्गुरू मारुतिकिंकर, पुण्डरीक शास्त्री आदि ने इसमें भागीदारी की।

जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री अयोध्यानाथ स्वामी ने वधू का पिता बन वर के पांव पूजे। फिर हल्दी, ईमली घोटाईं, बरनेत की रस्में हुई और वैदिक मंत्रोच्चार और सखी बने संतों के गीतों के बीच भगवान शालिग्राम का श्रीतुलसी जी से विवाह संपन्न हुआ। जर्मनी से आए दार्शनिक एवं वैदिक शोधकर्ता जोखिम नुश्च ने तुलसी जी को हल्दी चढ़ाई। विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे सुगंधित पुष्पों से सुसज्जित विवाह मंडप में सिंदूर दान हुआ और संत अयोध्यानाथ स्वामी जी ने कन्यादान किया। संतों ने वधू का चुमावन किया। विवाह के बाद तुलसी जी की विदाई के समय वीतरागी संतों की आंखे नम हो गई। तुलसी जी का विवाह देख बिहार के कैमूर जिले से आए श्रद्धालु शैलेन्द्र चौबे और रोहतास के रजनीकांत पाण्डेय, वाराणसी के डॉ राकेश तिवारी एवं पंडित जयप्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने ऐसा अद्भुत विवाह जीवन में नहीं देखा था, शरीर और आत्मा तृप्त हो गयी।