रवि पुष्य योग का महत्व

यह योग किसी भी शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है। मुहूर्त हो या न हो, नक्षत्रों की स्थिति प्रतिकूल या अनुकूल होती है। इस योग में किया गया कार्य बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इस योग में विवाह नहीं होता है। यह योग यंत्र सिद्धि के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में पूजा करना भी बहुत फलदायी माना जाता है। इस योग में आर्थिक समृद्धि आने वाली मानी जाती है।

गुरु पुष्य योग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु पुष्य योग को सभी योगों में श्रेष्ठ माना गया है। इस योग में किसी भी कार्य का प्रारंभ पूर्ण और सफल माना जाता है। जब पुष्य नक्षत्र रविवार और गुरुवार को पड़ता है तो इसे गुरु पुष्यमृत योग और रवि पुष्यमृत योग कहते हैं। इन दोनों योगों में पड़ने वाली धनतेरस को बहुत ही शुभ माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार इसी नक्षत्र में धन की देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इस योग में विवाह भी वर्जित होता है। इस योग में शुरू किया गया नया कार्य सफल माना जाता है। इस योग में किसी नए कार्य को प्रारंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है।