News India Live, Digital Desk: आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि किसी सुपरहिट टीवी सीरियल पर फिल्म बनने वाली है। ‘भाभी जी घर पर हैं’ जैसे शोज़ को लेकर भी अक्सर ऐसी चर्चाएं गरम रहती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में इस चलन की शुरुआत कहाँ से हुई थी? अगर आपको लगता है कि यह कोई नई बात है, तो ज़रा पीछे मुड़कर देखिये। साल 2010 में ही एक ऐसा कमाल हो चुका था, जिसने सबको हैरान कर दिया था।
हम बात कर रहे हैं सबकी चहेती ‘खिचड़ी’ (Khichdi) की। प्रफुल, हंसा, बाबूजी और हिमांशु—ये वो किरदार थे जिन्होंने ड्राइंग रूम से निकलकर सीधे बड़े परदे यानी सिनेमाहॉल में अपनी जगह बनाई।
‘खिचड़ी’भारतीय टीवी इतिहास का पहला ऐसा प्रयोग
ये महज़ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक बहुत बड़ा रिस्क था। उस वक्त तक किसी ने नहीं सोचा था कि टीवी सीरियल के कलाकार और वही कहानी फिल्म के तौर पर भी बिक सकती है। लेकिन ‘खिचड़ी: द मूवी’ ने वो कर दिखाया जिसे देखकर फिल्म पंडित भी चकित रह गए। यह पहला ऐसा इंडियन टीवी सीरियल था, जिसे फीचर फिल्म में बदला गया।
कैसा रहा बॉक्स ऑफिस का हाल और रेटिंग्स?
अक्सर ऐसी फिल्मों के साथ डर रहता है कि लोग टीवी पर मुफ्त में देखने वाली चीज़ के लिए पैसे खर्च करेंगे या नहीं। ‘खिचड़ी’ फिल्म ने बहुत बड़े करोड़ों के आंकड़े तो नहीं छुए, लेकिन इसे एक ‘स्लीपर हिट’ माना गया। लोगों को हंसा और प्रफुल की वही मासूमियत और बाबूजी का चिड़चिड़ापन सिनेमा में भी खूब पसंद आया।
IMDb रेटिंग की बात करें, तो आज भी ‘खिचड़ी’ अपनी कल्ट कॉमेडी के लिए जानी जाती है और इसे दर्शकों की तरफ से हमेशा अच्छी रेटिंग मिलती रही है। इसने साबित किया कि अगर किरदार और राइटिंग मज़बूत हो, तो टीवी से फिल्म का सफर बहुत सुहाना हो सकता है।
‘भाभी जी घर पर हैं’ के लिए मिसाल
अब जबकि ‘भाभी जी घर पर हैं’ जैसे सिटकॉम को लेकर खबरें आती हैं, तो अक्सर लोग इसकी तुलना खिचड़ी के उस शुरुआती कदम से करते हैं। इन शोज़ की सबसे बड़ी ताकत इनकी देसी कॉमेडी है, जिसे आम लोग अपनी ज़िंदगी से जोड़ पाते हैं। ‘भाभी जी’ की लोकप्रियता भी आज उसी मुकाम पर है जहाँ कभी ‘खिचड़ी’ हुआ करती थी।
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