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इविवि के पुरा छात्र सम्मेलन में पुरा छात्रों ने अनुभव साझा किये

प्रयागराज, 27 अप्रैल (हि.स.)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शनिवार को पुरा छात्र सम्मेलन (एलुमनाई मीट), ‘फ़ैमिलियर फेसेस फीएस्टा’ का शुभारम्भ किया गया। शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आशीष कुमार चौहान, कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव, यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रधान प्रो. हेरम्ब चतर्वेदी और सचिव प्रो. कुमार बीरेंद्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विश्वविद्यालय के पुरा छात्रों में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों में पदासीन न्यायाधीश सहित कई लोग भाग ले रहे हैं। इसी के साथ, देश के कई शहरों से विभिन्न पदों पर आसीन अधिकारी भी शामिल हुए। फिल्म एवं साहित्य जगत में देश-विदेश में नाम कमा रहे पुरा छात्रों ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

इस दौरान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वीएन खरे ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अपने अनुभव साझा किए। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वह अपने विद्यार्थी जीवन में साइकिल से पूरे शहर को नापा करते थे। उन्होंने मौजूद लोगों से अपील की है कि विश्वविद्यालय खासकर विज्ञान संकाय को देखकर इसके गौरवशाली इतिहास को समझें।

वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण मुरारी ने अपनी शिक्षा, ज्ञान एवं अपने कृतज्ञता से भरे व्यक्तिव का श्रेय इलाहाबाद विश्वविद्यालय को देते हुए कहा कि इस संस्था ने मेरे जीवन को एक सार्थक दिशा प्रदान की है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धुलिया ने भी अपने अनुभव साझा किए। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस पंकज मित्तल से शिक्षकों की तारीफ करते हुए कहा इस विश्वविद्यालय में शिक्षक ऐसे पढ़ाते थे कि परीक्षा के लिए किताब खोलने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी।

वहीं, फिल्म निर्देशक तिग्मांशू धुलिया ने कहा कि जब मैं यहां पढ़ता था तब शिक्षक ऐसी फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे कि ऐसा लगता था कि वह भारत में नहीं बल्कि ऑक्सफोर्ड में बैठे हैं। उन्होंने कहा यदि मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नहीं होता तो मुम्बई में इतना बड़ा नाम नहीं कमा पाता। इस दौरान पुरा छात्र प्रवीण राय सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल इमारतों एवं चहारदीवारी से नहीं बनता है, बल्कि उसकी पहचान वहां से पढ़कर निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों से बनती है। यहां के विद्यार्थियों ने जीवन के हर क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों से विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। विश्वविद्यालय आज भी उत्कृष्ट शिक्षा, ज्ञान एवं कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए यहां के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी पूरी लगन के साथ दिन-रात मेहनत करते रहते हैं। हमारे पूर्व विद्यार्थियों के सहयोग से ईश्वर टोपा भवन का निर्माण हुआ है। उन्होंने आशा जताई कि आगे भी पुरा छात्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विकास में भरपूर सहयोग करते रहेंगे। कुलपति ने कहा जिस तरीके से विश्वविद्यालय अभी कार्य कर रहा है, निश्चित तौर पर एनआईआरएफ के सर्वश्रेष्ठ 200 संस्थाओं की सूची में अपना स्थान बनाएगा तथा नैक में ए प्लस प्लस रेटिंग अर्जित करेगा।

–एलुमनाई एसोसिएशन का मोबाइल ऐप लांच, पुस्तकों का लोकार्पण

सम्मेलन में एलुमनाई एसोसिएशन के मोबाइल ऐप “यूओएएए” के चासंलर प्रो आशीष कुमार चौहान एवं वीसी प्रो.संगीता श्रीवास्तव ने लांच किया। इविवि पर आधारित फिल्म ‘द बनियान ट्री’ को भी रिलीज किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के डीजीपी रहे ओम प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘क्राइम, ग्राइम एंड गुप्शन’ का अनावरण किया गया। इसी क्रम में पुरा छात्रा अनामिका श्रीवास्तव का काव्य संग्रह ‘शब्दनाद’ का लोकार्पण किया गया। वहीं, पुरा छात्र वीरेंद्र ओझा की पुस्तक ‘दास्तान और भी है’ का अनावरण किया गया।

–सांस्कृतिक संध्या में गीतों एवं गजलों से बांधा समां

एलुमनाई मीट के पहले दिन शाम में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसमें भजन, तबला वादन, सितार वादन, लोक संगीत, रूसी गीत, वेस्टर्न क्लासिक गीत, कविताएं एवं गजल की प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही समूह नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर जया कपूर और डॉ.सोनल शंकर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन एलुमिनाई एसोसिएशन के सचिव प्रो.कुमार बीरेंद्र ने किया। कार्यक्रम के दौरान भरतनाट्यम नृत्यांगना उर्वशी जेटली ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति दी।