Sunday , December 7 2025

आज रात सो मत जाना! साल की इस सबसे ‘जादुई’ रात में खुद धरती पर पधारेंगी माँ लक्ष्मी

साल में सिर्फ एक रात ऐसी आती है जब माँ लक्ष्मी स्वयं धरती पर यह देखने के लिए भ्रमण करती हैं कि “को जागर्ति?” –यानी, “कौन जाग रहा है?”। और जो भी भक्त इस रात जागरण करके माँ का ध्यान करता है,माँ उसकी झोली खुशियों और धन-धान्य से भर देती हैं।यह चमत्कारी और दिव्य रात कोई और नहीं,बल्किशरद पूर्णिमाकी रात है,जिसेकोजागर पूर्णिमायाकोजागरी पूजाके नाम से भी जाना जाता है।आज, 6अक्टूबर2025,सोमवार,को यही पावन रात है। आज की रात आसमान का चांद अपनी16कलाओं से परिपूर्ण होगा और धरती के सबसे करीब होगा। माना जाता है कि आज रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है।पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त (निशीथ काल)माँ लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय मध्यरात्रि का होता है,जिसे निशीथ काल कहते हैं।यह मुहूर्त6अक्टूबर की रात11:45से लेकर देर रात12:35तक रहेगा।इस समय माँ लक्ष्मी की पूजा करने से वे अत्यंत प्रसन्न होती हैं और घर में स्थिर रूप से वास करती हैं।क्यों है इस रात की‘अमृत वाली खीर’इतनी खास?इस रात की सबसे खूबसूरत परंपरा है खुले आसमान के नीचे‘अमृत वाली खीर’रखना।आस्था:माना जाता है कि जब रात में चांद की अमृतमयी किरणें इस खीर पर पड़ती हैं,तो यह खीर भी अमृत के समान गुणकारी हो जाती है,जो सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती।कैसे रखें:शाम को खीर बनाकर किसी चांदी,मिट्टी या कांसे के बर्तन में रखें। इसे एक पतले जालीदार कपड़े से ढककर अपनी छत या बालकनी में ऐसी जगह रखें जहां चांद की रोशनी सीधी पड़े। अगली सुबह इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।कैसे करें माँ लक्ष्मी की सरल पूजा?शाम के समय घर की साफ-सफाई करके मुख्य द्वार पर घी का एक दीपक जलाएं।पूजा स्थान पर माँ लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और उन्हें लाल चुनरी,कमल का फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।भोग के रूप में माँ कोमखाना,बताशे,खीरऔर सफेद मिठाइयां चढ़ाएं।घी का दीपक जलाकरश्री सूक्तयालक्ष्मी चालीसाका पाठ करें और फिर माँ की आरती गाएं।इस रात जागरण का विशेष महत्व है,इसलिए भजन-कीर्तन करें या फिर चौपड़/पासे का खेल भी खेल सकते हैं (यह भी एक परंपरा है)।यह रात अपनी किस्मत के ताले खोलने और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का साल का सबसे बड़ा और सुनहरा मौका है,इसे व्यर्थ न जाने दें।