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शिक्षकों से शिक्षा विभाग की अपील- 33% जरूर आएं:अपर मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश- जहां दो शिक्षक हैं वे बारी-बारी से स्कूल आएं

शिक्षा विभाग द्वारा नए आदेश की कॉपी राज्य के सभी DM और DEO को भी भेजी गई है। - Dainik Bhaskar

शिक्षा विभाग द्वारा नए आदेश की कॉपी राज्य के सभी DM और DEO को भी भेजी गई है।

  • राज्य प्राथमिक शिक्षक ने कहा- परेशान कर रही सरकार
  • प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेल्फेयर एसोसिएशन ने CM के सामने रखी 5 मांगें

बिहार के सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों को लेकर सरकार निर्देश दे चुकी है कि वे 15 मई तक बंद रहेंगे। शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश दिए जा चुके हैं लेकिन इसको लेकर कई विद्यालयों में शिक्षकों के बीच कंफ्यूजन की स्थिति है और यह विद्यालयों में झगड़े का रुप लेता जा रहा है। कई विद्यालयों से विभाग को शिकायतें मिल रही हैं। दिक्कत यह हो रही है कि कोरोना की भयावहता को देखते हुए विद्यालय निर्देश की व्याख्या करने लगे थे लेकिन अब शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने कंफ्यूजन को खत्म करने के लिए 22 अप्रैल को नया आदेश जारी किया है। इसकी कॉपी राज्य के सभी DM और DEO को भी भेजी गई है।

साफ-साफ शब्दों में दिए गए ये 4 निर्देशः

  1. सभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और अन्य शैक्षणिक संस्थान 15 मई 2021 तक बंद रहेंगे। इस अवधि तक में राज्य सरकार के विद्यालय और विश्वविद्यालय द्वारा किसी भी तरह की परीक्षाएं नहीं ली जाएंगी। बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार तकनीकी चयन आयोग, केन्द्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती), बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पर यह लागू नहीं होगा। ऑन लाइन शैक्षणिक कार्यक्रम पहले की तरह चलते रहेंगे।
  2. प्राथमिक विद्यालयों में जहां दो शिक्षक हैं वहां बारी-बारी से शिक्षक विद्यालय में उपस्थिति रहेंगे और जहां दो से अधिक शिक्षक पदस्थापित हैं वहां प्रतिदिन बारी-बारी से 33 प्रतिशत उपस्थित रहेंगे।
  3. मध्य विद्यालय, माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संदर्भ में प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रतिदिन उपस्थित रहेंगे और शेष शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मी प्रतिदिन बारी-बारी से 33 प्रतिशत उपस्थित रहेंगे।
  4. विश्वविद्यालय या महाविद्यालय के संदर्भ में सह प्राध्यापक, प्राध्यापक और उनके समकक्ष स्तर व ऊपर के सभी पदाधिकारी प्रतिदिन उपस्थित रहेंगे और सहायक प्राध्यापक व उनके समकक्ष पदाधिकारी व उनके न्यून सभी पदाधिकारी व कर्मी बारी-बारी से प्रतिदिन 33 प्रतिशत उपस्थित रहेंगे।

प्राथमिक शिक्षक संघ ने कहा- परेशान करने में लगी है सरकार

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार कहते हैं कि अनावश्यक रुप से शिक्षकों को परेशान कर रही है सरकार। पिछली बार दिव्यांगों और महिलाओं को घर के पास के स्कूल में हाजरी बनाने की छूट थी। कोरोना की स्थिति यह है कि 15 फीसदी शिक्षक स्कूल आने-जाने के क्रम में पीड़ित हो गए हैं और उनके परिवार के सदस्य भी इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। स्कूल में स्टूडेंट ही नहीं हैं तो फिर 33 फीसदी शिक्षकों के साथ प्रधानाध्यापक या प्राचार्य को हर दिन स्कूल बुलाने का कोई मतलब ही नहीं है।

प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने रखी मांग:
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेल्फेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा है कि शिक्षकों की स्थिति बहुत खराब है। शिक्षक कोरोना से ज्यादा वेतन नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के सामने एसोसिएशन ने पांच सूत्री मांग रखा है-

  • निजी शिक्षण संस्थानों को मकान का भाड़ा सरकार द्वारा भुगतान किया जाए।
  • विद्युत बिल के भुगतान की समुचित व्यवस्था की जाए।
  • निजी शिक्षण संस्थानों में चलाए जा रहे वाहनों का सभी तरह के टैक्स और इंश्योरेंस की भरपाई सरकार करें‌।
  • स्कूल संचालक, प्राचार्य, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का बंद अवधि का प्रति व्यक्ति कम से कम 10000 की राशि प्रति माह की दर से भुगतान मानदेय के रूप में किया जाए‌ और 50 किलो अनाज परिवार को जिंदा रहने के लिए दिया जाए।
  • निजी शिक्षण संस्थानों के संचालक और व्यवस्थापक को संचालन की व्यवस्था और रख रखाव के एवज में यथोचित राशि का भुगतान किया जाए।

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