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वृंदावन कॉरिडोर मामले में फैसला सुरक्षित

प्रयागराज, 08 नवम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को मथुरा वृंदावन कॉरिडोर निर्माण मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया। अनंत शर्मा की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी।

इसके पहले याची की ओर से एक बार फिर सिविल कोर्ट द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई। जबकि, सेवायतों की ओर से कहा गया कि मंदिर उनका है। सरकार या कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उनके अधिकारों का हनन नहीं कर सकती है। ठाकुर जी के नाम पर वह कोई अधर्म नहीं कर सकते हैं। लिहाजा, कुंज गलियों में किसी तरह के तोड़फोड़ करने के पक्ष में नहीं है। सरकार ऐसा कर रही है तो वह संविधान के अनुच्छेद 25 का हनन है और गैरकानूनी है।

सेवायतों के अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने कहा कि उनकी ओर से तीन प्रस्ताव है। सरकार को इन तीनों प्रस्तावों पर विचार करना चाहिए। अधिवक्ता ने कहा कि उनका पहला प्रस्ताव मंदिर शिफ्ट करने का है। दूसरा, बैरिकेडिंग कर लाइन से सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराना और तीसर बांके बिहारी मंदिर से थोड़ी दूर नौ स्क्वायर किलोमीटर भूमि है। उस पर अतिक्रमण है। एनजीटी और हाईकोर्ट का अतिक्रमण हटाने का आदेश है। सरकार उस भूमि को संरक्षित कर वहां से लाइन से दर्शन कराने की व्यवस्था कर सकता है। हालांकि, यूपी सरकार की ओर से इन प्रस्तावों पर आपत्ति उठाते हुए अपने कॉरिडोर निर्माण के प्रस्ताव पर बल दिया। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।z