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फतेहपुर: मतदाता बने चुनावी भगवान, प्रत्याशी हो रहे नतमस्तक

फतेहपुर : जिले में आगामी 26 अप्रैल को मतदान होना है। गांव की सरकार बनाने का बिगुल बजते ही मतदाताओं को रिझाने के लिए पैलगी की जा रही है। घर से लेकर खेत तक मतदाताओं की आवभगत के लिए प्रत्याशी चप्पलें घिस रहे हैं। शराब का दौर भी चल रहा है। मतदाता भी इस चुनावी बयार का भरपूर लुफ्त ले लेना चाहता है। चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशी भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। लोगों से विकास के वायदे कर रहे हैं। चुनाव मैदान में उतरा हर प्रत्याशी ईमानदार, कर्मठ और अपना हो गया है। जाति-धर्म के बंधन कुछ इस तरह से टूट गए हैं कि लोगों को यह समझ में ही नहीं आ रहा कि आखिर अपना कौन है?

हालात यह हो गए हैं कि जिन्होंने कभी पलट कर लोगों की तरफ नहीं देखा वह वोट के लिए जनसेवक व समाजसेवी बन कर मतदाताओं के पैरों में ऐसे नतमस्तक हैं जैसे मतदाता भगवान हो। गांवों में शराब पार्टियों व दावतों का दौर शुरू है। चुनाव किसी करवट बैठे वो बात दीगर है लेकिन फिलहाल मतदाताओं की बल्ले-बल्ले है।

जिले में 13 विकास खंडों की 834 ग्राम पंचायतों, 10554 ग्राम पंचायत सदस्यों, 1135 क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं 46 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव को लेकर तीसरे चरण में मतदान 26 अप्रैल को होगा। ऐरायां विकास खंड के अल्लीपुर बहेरा में अनुसुइया देवी निर्विरोध अकेली जिले में ग्राम प्रधान चुनी जा गई हैं। जबकि 5100 ग्राम पंचायत सदस्य एवं 22 क्षेत्र पंचायत सदस्यों का चुनाव निर्विरोध हुआ है। सबसे अधिक मारामारी ग्राम प्रधान व जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा, आप, प्रसपा सहित अन्य छोटे दलों ने अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं, जबकि बड़ी संख्या में निर्दल प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। वोट अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशी रात-दिन एक किए हुए हैं। मतदाताओं के बीच पहुंच उनके हर सुख-दुख के साथी बनने का वायदा कर एक बार सेवा का मौका मांग रहे हैं।

मलवां विकास खण्ड के गांव बालापुर निवासी संतोष सिंह का कहना है कि चुनाव मैदान में उतरे अनगिनत ऐसे प्रत्याशी हैं जो पूर्व में भी लोगों के बीच जाकर यही वायदे कर वोट ले चुके हैं, लेकिन जीतने के बाद आम जनता का उन्होंने ध्यान कितना रखा यह तो लोग जाने और वे प्रत्याशी। लेकिन जिस तरह से मतदान का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे लोगों में चुनावी खुमार चढ़ रहा है। चुनावी चहल कदमी में लोगों का जीना दूभर हो रहा है न दिन को चैन है और ना रात में सुकून मिल रहा है। एक प्रत्याशी जा रहा है तो दूसरा कुंडी खटखटा रहा है। घर से लेकर खेत तक प्रत्याशी मतदाताओं के बीच वोट मांगने के लिए पहुंच रहे हैं।

राधेश्याम का कहना है कि चुनाव अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं के बीच शराब पार्टियां व दावतें दी जा रही हैं तो कई क्षेत्रों से कुछ और नजराने गुपचुप दिए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि जनता के बीच सेवक बनकर जाने वाले समाजसेवी ऐसे भी हैं जिन्होंने गरीबों की ओर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा लेकिन आज चुनावी समर में प्रत्याशियों को मतदाताओं में भगवान नजर आ रहे हैं। पैरों में नतमस्तक मतदाताओं को अम्मा, बाबूजी, काका, चाची बनाकर जीत का आशीर्वाद इस तरह मांग रहे हैं जैसे वे उनकी सगी औलादें हों और उनके जीवन के तारणहार यही बनने वाले हैं।

जबकि हकीकत यह है कि वोट लेने के बाद कभी जनता के दुख-दर्द में न शामिल होने वाले और सरकारी खजाने की बाट लगा अपना ही विकास करने वाले प्रत्याशी भी आज इतने सहज, सरल, सौम्य, कर्मठ, इमानदार, जनसेवक बन गए हैं जैसे अब इनका जीवन लोगों की सेवा में ही बीतने वाला है।

 खैर कुछ भी हो लेकिन मतदान के पहले तक लोगों को चुनावी जश्न मनाने का खूब मौका मिला मिल रहा है। मतदाता चटखारे ले रहे हैं, चौपालों में बस चुनावी बयार है तो वोट किसे देना है उसकी चर्चा भी मतदाताओं के बीच हो रही है।

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