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पूर्व विधायक किशोर कुमार ने राम – जानकी विवाहोत्सव मेला का उद्घाटन किया

सहरसा,18 दिसंबर (हि.स.)। सौर बाज़ार प्रखंड के सहुरिया पूर्वी पंचायत के मुरचा गांव में राम जानकी विवाहोत्सव मेला का उद्घाटन नव निर्माण मंच के संस्थापक पूर्व विधायक किशोर कुमार ने फीता काट कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मेला समिति के अध्यक्ष त्रिपुरारी झा ने किया।

इस अवसर पर सौर बाज़ार नगर पंचायत उपसभापति दुर्गाकान्त झा उर्फ़ मोल झा भी उपस्थित थे। सर्वप्रथम पूर्व विधायक किशोर कुमार को पंडितों ने भगवान का विधि पूर्वक पूजा करवाया।वहीीपूर्व विधायक किशोर कुमार ने कहा कि मेला बहुत प्राचीन है। यहां मान्यता है कि इस दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मनौती सफलतापूर्वक मिल जाती है। ईश्वर भी खुद कहते हैं कि यदि कर्म ईमानदारी से हो तो फल जरुर मिलता है।मनुष्य का कर्म ही ईश्वर है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम और मां जानकी का दाम्पत्य जीवन दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। यह 7 जन्मों का संबंध है। आदर्श दाम्पत्य जीवन ही भारत के हर नर नारी का जीवन जीने का उदाहरण है।भगवान राम ने शबरी का झूठा बैर खाकर, मां अहिल्या का उद्धार कर, माता पिता की आज्ञा का पालन कर, ऋषि मुनि के यज्ञ की रक्षा कर, सुग्रीव से दोस्ती, अनुसूचित जन जाति आदिवासी भील लोगों के साथ संबंध स्थापित कर, निषाद राज से मित्रता कर, विभिषण को सम्मान देकर, भाई भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण को असीम प्यार देकर तथा अयोध्या की समस्त जनता को न्याय देकर, जो उदाहरण प्रस्तुत किया तथा मां सीता ने जिस तरह पतिव्रता नारी का जीवन जी कर, त्रिजटा को मां मानकर, अपनी सास जिनकी वजह से श्री राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ कैकयी को अपनी मां और सगा सास से ज्यादा सम्मान और अपना मां मान वे दुनिया के लिए अनुपम उदाहरण बन गयी।

उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास लाखों वर्षों का है। हमारे यहां ना पूर्व में कोई जाति थी और ना अलग अलग धर्म था। सिर्फ सनातन परम्परा थी।बाद के दिनों में सत्ता और राज्य करने के स्वार्थ ने हमें जाति धर्म में बाँट दिया। हम एक दुसरे से नफरत करने लगे। एक दुसरे को शक के निगाह से देखने लगे। हमारे पूर्वज श्री राम, श्री कृष्ण एवं कई महान पुरुष हैं। जिन्होने अनेकता में एकता का पाठ पढ़ाया।आज हमारी संस्कृति को विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। धर्म या सम्प्रदाय कोई भी हो, वह हमें नफरत नहीं प्रेम और आपसी सद्भाव सिखाता है और भगवान राम और माता जानकी ने भी तो यही ज्ञान दिया है।