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नए टीबी मरीजों के परिजनों की सिर्फ तीन माह चलेगी ‘प्रिवेंटिव थेरेपी’

वाराणसी, 06 जुलाई (हि.स.)। वाराणसी जनपद में ऐसे टीबी मरीज जिन्हें फेंफड़े (पल्मोनरी) की टीबी है। उनके संपर्क में आने वाले या साथ रहने वाले परिजन के लिए टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) का कोर्स कम कर दिया गया है, जिससे उन्हें प्रतिदिन दवा खाने से राहत मिलेगी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने शनिवार को बताया कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने और प्रधानमंत्री के विजन को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में अब टीबी मरीजों के संपर्कियों को सिर्फ तीन माह तक टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जाएगी। इसके लिए जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) ने समस्त तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस) और टीबी हेल्थ विजिटर (टीबीएचवी) को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने बताया टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी के अंतर्गत पहले कोंट्रेक्ट पर्सन को छह माह तक दवा का सेवन करना पड़ता था। ऐसे में वह प्रतिदिन दवा का सेवन करना भूल जाते थे, जिससे अब उन्हें राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जनपद में ड्रग सेंसेटिव टीबी (डीएसटीबी) के 7566 मरीज हैं। इसमें पल्मोनरी के 4366 मरीज हैं। इन सभी मरीजों को परिजनों को अब तक छह माह की टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी दी जा चुकी है। लेकिन अब जितने भी टीबी के नए मरीज नोटिफ़ाई किए जाएंगे, उनके परिजनों को अब सिर्फ तीन माह की थेरेपी चलाई जाएगी। जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को फेंफड़े की टीबी हो जाती है तो वह कम से कम 15 व्यक्तियों को टीबी से संक्रमित कर सकता है। इसलिए परिवार के लोगों के ऊपर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

—लक्षण दिखे तो कराएं जांच

अगर किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते से खांसी आए, बलगम में खून आए, रात में बुखार के साथ पसीना आए, तेजी से वजन घट रहा हो, भूख न लगे तो नजदीकी सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, टीबी यूनिट पर निःशुल्क टीबी जांच करवा सकते हैं। अगर जांच में टीबी की पुष्टि हो तो पूरी तरह ठीक होने तक इलाज चलाना है।