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तो ये है कोरोना के इलाज की हकीकत!:रात एक बजे भास्कर ने किया फोन तो कंट्रोल रूम से कहा गया- प्राइवेट में ऑक्सीजन देखें, NMCH ने कहा- पेट के बल लेट जाएं

  • सांस की समस्या वाले मरीजों के लिए भी कंट्रोल रूम के पास कोई व्यवस्था नहीं

कोरोना काल में खुद सावधान रहिए, प्रशासन के भरोसे जान बचाना मुश्किल होगा। संक्रमितों के इलाज को लेकर व्यवस्था कितनी चौकस है, इसकी पोल भास्कर की पड़ताल में खुल गई है। रात में एक बजे जब भास्कर ने गंभीर मरीज को भर्ती कराने के लिए कंट्रोल रूम को फोन किया तो डॉक्टर ने कहा प्राइवेट में ऑक्सीजन की व्यवस्था कर लीजिए। मरीज की जान बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। आप भी जान लीजिए कोरोना के गंभीर लक्षण वाले मरीजों के लिए कितना एक्टिव है प्रशासन।

डॉक्टर ने कहा- ऑक्सीजन की व्यवस्था की कीजिए

कंट्रोल रूम को लेकर बड़े बड़े दावे किए जाते हैं। गुरुवार की रात एक बजे जब कंट्रोल रूम का 104 डायल किया गया और यह बताया कि कि एक मरीज है, जिसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऑक्सीजन लेवल 80 चला गया गया है। कोरोना का हर लक्षण है, लेकिन जांच नहीं कराई गई है। इस पर कंट्रोल रूम ने कॉल डॉक्टर को ट्रांसफर कर दी। डॉक्टर ने पूरी समस्या सुनने के बाद यह माना कि मरीज की हालत काफी गंभीर है और उसे तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत है। कंट्रोल रूम के डॉक्टर ने एम्बुलेंस या अन्य कोई व्यवस्था की बात नहीं कही। उनका एक जवाब था कि प्राइवेट में किसी से ऑक्सीजन सिलेंडर ले लीजिए और मरीज को तत्काल लगाइए। भास्कर ने कहा DM के निर्देश पर प्राइवेट लोगों को ऑक्सीजन देने पर रोक लगा दी गई है, ऐसे में कौन ऑक्सीजन सिलेंडर इतनी रात में देगा। डॉक्टर का जवाब था कि मिल जाता है आप प्रयास कर लीजिए। डॉक्टर से फिर मरीज की हालत को लेकर रिक्वेस्ट किया गया तो उनका कहना था कि आस पास के किसी छोटे हॉस्पिटल में जाकर भर्ती करा दीजिए, जहां ऑक्सीजन मिल जाए। सरकारी अस्पतालों में तो कहीं कोई व्यवस्था नहीं है।

NMCH और PMCH ने कहा बेड फुल, भर्ती संभव नहीं

भास्कर ने NMCH के कंट्रोल रूम के नंबर 06122630104 पर फोन किया तो बताया गया कि एक भी बेड खाली नहीं है। सांस की समस्या का हवाला देने के बाद भी कर्मचारी ने कहा कि बेड खाली ही नहीं है। यहां रजिस्ट्रेशन को लेकर मारपीट की स्थिति है। ऐसे में भर्ती होना संभव ही नहीं है। कर्मचारी ने ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए देसी उपाया तो बता दिया कि पेट के बल लिटाकर तकिया लगा दीजिए, लेकिन बेड खाली नहीं होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। PMCH में भी वैसा ही जवाब था। एक भी बेड खाली नहीं था, जिससे कंट्रोल रूम ने किसी अन्य हॉस्पिटल में प्रयास करने की बात कही। दो बड़े हॉस्पिटल से कोई मदद नहीं मिल सकी।

प्राइवेट में कहीं बंद तो कहीं नहीं अटेंड हुआ नंबर

दो बड़े सरकारी अस्पताल और कंट्रोल रूम से मदद नहीं मिलने के बाद जब भास्कर ने शहर के लगभग 10 प्राइवेट हॉस्पिटल को फोन लगाया तो वहां भी कोई मदद नहीं मिल पाई। किसी का नंबर नहीं अटेंड हुआ तो कहीं का फोन ही बंद था। फोर्ड में बताया गया कि एक भी बेड खाली नहीं है। हाईटेक में भी बेड खाली नहीं होने की बात कही गई। समय हॉस्पिटल में भी बेड फुल मिला। मेडिवसर्ल का भी बेड फुल था। रूबन में एक भी बेड खाली नहीं था। किसी भी हॉस्पिटल में कहीं कोई व्यवस्था नहीं बन पाई।

इसलिए आप भी रहें सावधान

कोरोना को लेकर गंभीर नहीं रहने वाले अगर प्रशासन के दावों पर विश्वास कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं। इमरजेंसी में एक बेड की व्यवस्था बड़ी चुनौती होगी। पटना के सभी बड़े सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल फुल चल रहे हैं। मरीजों की भीड़ से बवाल की स्थिति बन रही है। ऐसे में कोरोना की गाइडलाइन तोड़ने वालों को भविष्य को लेकर हमेशा सावधान रहना चाहिए, हालत गंभीर होने पर ऑक्सीजन और बेड के लिए तरस जाएंगे।

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