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ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर कोरोना की मार, रोजाना 1000 करोड़ रुपए का नुकसान

मुंबई : कोरोना महामारी के कारण घोषित कड़े प्रतिबंधों की मार ट्रांसपोर्ट सेक्टर को पड़ रही है। देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभानेवाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर को प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

देशभर में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण हाहाकार मचा हुआ है। अति आवश्यक व आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य लेनदेन बंद हैं। धारा 144, नाइट कर्फ्यू ट्रक चालकों और मालिकों के लिए मुसीबत बन गया है। कारखाने तो चल रहे हैं लेकिन दुकानें बंद है, जिसके कारण माल ढुलाई में बड़े पैमाने पर कमी आई है। ट्रांसपोर्ट कारोबार 25 प्रतिशत से भी कम दायरे में आकर सिमट गया है।

दुग्ध, कार्गो, सब्जी, फल, दवा, वैक्सीन, पेट्रोलियम पदार्थों की ढुलाई जैसी आवश्यक सेवाएं जारी हैं, लेकिन वापसी में ऑर्डर ना मिलने के कारण ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। माल ले जाने के बाद वापसी में उन्हें कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में ड्राइवरों व क्लीनरों के भोजन व वेतन आदि का खर्चा भारी पड़ रहा है। ईंधन का खर्च, टोल टैक्स, वाहन की किस्त सहित अन्य टैक्स को लेकर ट्रांसपोर्टर सकते में है।

मुंबई के शिवड़ी से लेकर मस्जिद बंदर तक बड़े पैमाने पर ट्रक चालक और क्लीनर फंसे हुए हैं। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के दीना राजभर बताते हैं कि वे सीमेंट सप्लाई का ट्रक चलाते हैं। कई दिनों से वे और उनके साथी ड्राइवर रोड में फंसे हुए हैं। निर्माण कार्य क्षेत्र में सीमेंट की मांग ना होने पर ट्रक के पहिए थमे हुए हैं। भोजन की व्यवस्था किसी तरह हो जा रही है, लेकिन यह कब तक चल पाएगा। वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। ट्रक मालिक कुछ पैसे देकर हाथ ऊपर कर ले रहे हैं। घर पर लोग परेशान हैं। हम लोग अब मजबूरी में घर वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

इसी तरह नेशनल परमिट का ट्रक चलाने वाले सतना के कमलेश सिंह बताते हैं, मध्य प्रदेश से माल लेकर मुंबई पहुंचे हैं लेकिन ढुलाई का आर्डर ना होने के कारण यहां फंसे हुए हैं। उत्तर प्रदेश प्रतापगढ़ जिले के सोनू कुमार ने बताया कि वे और उनके कुछ साथी ड्राइवर सब्जी मालवाहक ट्रक के माध्यम से नासिक जा रहे हैं। वहां से ट्रक के माध्यम से अपने गांव लौट जाएंगे। काम पूरी तरह से बंद है। मालिक हमें बिठाकर कितने दिनों तक खिलाएगा। भोजन के अलावा और भी जरूरतें हैं। हम अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करें।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट के बाल मलकीत सिंह के मुताबिक जान है तो जहान है। हम सरकार के हर फैसले का स्वागत करते हैं। हम सरकार को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। हालांकि ट्रांसपोर्ट सेक्टर को हर दिन 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। बाहरी राज्यों में आने-जाने वाले ट्रकों में दो से तीन ड्राइवरों और क्लीनर की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट में अन्य कर्मियों की जरूरत होती है। माल ढुलाई में 50 फ़ीसदी की गिरावट आई है। एक राज्य से दूसरे राज्य में चले जाएं तो वापसी में खाली आने का संकट है। या फिर वह इंतजार करें। ड्राइवरों और क्लीनर का खर्च के अलावा वाहन पर लगने वाले टैक्स, किस्त, पार्किंग जैसे इत्यादि खर्च से ट्रक मालिकों की कमर टूट रही है। डीजल की कीमत आसमान छू रही है।

मलकीत सिंह के अनुसार सरकार को चाहिए कि इस विपदा में टैक्स में हमें राहत दे। टोल टैक्स में छूट देने के साथ ही रास्ते में ट्रक चालकों को प्रताड़ित ना किया जाए। देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभानेवाले ट्रक चालकों और क्लीनरों को कोरोना योद्धा मानकर उनके टीकाकरण व अन्य मेडिकल सुविधाओं का प्रबंध कराया जाए।

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