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कोरोना पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला:IGIMS पटना में सभी मरीजों का इलाज फ्री, दवा सहित सारे चिकित्सीय खर्च सरकार उठाएगी

IGIMS पटना में अब कोविड मरीजों की दवा सहित सारे चिकित्सीय खर्च सरकार खुद उठाएगी। - Dainik Bhaskar

IGIMS पटना में अब कोविड मरीजों की दवा सहित सारे चिकित्सीय खर्च सरकार खुद उठाएगी।

बिहार में कोरोना की दूसरी लहर में 1897 मौतों और 75 हजार से ऊपर एक्टिव केस के बाद कोविड मरीजों के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अब IGIMS पटना में सभी कोविड मरीजों का मुफ्त इलाज होगा। मरीजों की दवा सहित सारे चिकित्सीय खर्च सरकार खुद उठाएगी। सरकार की इस पहल से उन लोगों को राहत मिलेगी, जो पैसे के अभाव में कोरोना से मरने को मजबूर हैं।

CM नीतीश ने सोशल मीडिया पर दी घोषणा की जानकारी।

CM नीतीश ने सोशल मीडिया पर दी घोषणा की जानकारी।

18+ के लोगों को वैक्सीन मुफ्त

बिहार में 1 मई से 18 साल से ऊपर के लोगों मुफ्त वैक्सीन दिया जाएगा। CM नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया है। इसके लिए सरकार पूरे स्वास्थ्य बजट का 32 % केवल वैक्सीनेशन पर खर्च करने जा रही है। 18 से ऊपर के कितने लोगों को वैक्सीन की डोज लेनी है? इसके लिए बिहार को कितनी डोज की जरूरत होगी? सबको टीका देने में कितने दिन का वक्त लगेगा? इसका पूरा लेख-जोखा तैयार किया जा रहा है।

बता दें कि बिहार की आबादी 14 करोड़ 58 लाख 26 हजार 297 है। इसमें 18 साल से ऊपर की आबादी 7 करोड़ 49 लाख 65 हजार 804 है यानी इतने लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज देनी होगी। इसके लिए 14 करोड़ 99 लाख 31 हजार 608 डोज वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। इसके तुरंत बाद दूसरी डोज के लिए भी इतनी ही वैक्सीन की जरूरत होगी। दोनों को मिला लें तो इसके लिए अलग से 10 करोड़ 69 लाख 3 हजार 212 डोज की जरूरत पड़ेगी।

दावों के उलट जमीनी हकीकत भी देखें

  • सरकारी दावा यह है कि अस्पतालों में बेड की कमी नहीं है। ऑक्सीजन की उपलब्धता पर भी पूरी नजर रखी जा रही है। इसके बाद भी भर्ती नहीं ले पाने और ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों की परेशानी के मामले राज्यभर से आ रहे हैं। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। AIMS पटना के निदेशक और राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव की दो सदस्यीय टीम को अस्पतालों का निरीक्षण करना है, ताकि मरीजों को बेड और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन मिलने में परेशानी ना हो।
  • बाजारों में दवाओं की कृत्रिम किल्लत भी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन रही है। सर्दी-खांसी और बुखार के लक्षण वाले मरीजों को दवा नहीं मिल पा रही है। गुरुवार को पटना के कमिश्नर ने इसको लेकर दवा के थोक विक्रेताओं से बात भी की है। दवाओं की कालाबाजरी की शिकायत आने पर छापेमारी और जेल जैसी सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई है।

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